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भास्कर एक्सपर्ट बोकारो में त्योहारों के सीजन में मिलावटी मिठाइयों और खाद्य पदार्थों का काला कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। प्रशासन की सुस्ती और लचर कार्यप्रणाली के कारण मिलावटखोर बेखौफ होकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिहार से बसों में नकली पनीर और खोवा लाकर बोकारो के मार्केट में खपाए जा रहे हैं। दुर्गा पूजा से लेकर दीपावली और छठ तक जिले में दूध, पनीर और खोवा की मांग बढ़ जाती है। इस मांग को पूरा करने के लिए बिहार समेत अन्य राज्यों से हर साल 4 से 6 टन पनीर, खोवा और दूध मंगाया जाता है। असली खोवा और पनीर 500-700 रुपए प्रति किलो बिकता है जो 2 दिन में खराब हो जाता है, जबकि सिंथेटिक खोवा 150-200 रुपए और पनीर 200-400 रुपए में आसानी से मिल जाता है और 7-10 दिनों तक टिकता है। लेकिन बोकारो में खाद्य सुरक्षा विभाग की लापरवाही के कारण जांच के नाम पर केवल औपचारिकता की जा रही है। अक्टूबर महीने में विभाग ने खोवा, पनीर, रसगुल्ला, बर्फी, कलाकंद और जलेबी के मात्र 27 नमूने लिए। इन्हें रांची स्थित राज्य स्तरीय प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया। खाद्य सुरक्षा विभाग के नियमानुसार नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर आ जानी चाहिए, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। डॉ. एचके मिश्रा(पूर्व पूर्व नोडल पदाधिकारी,स्वास्थ्य विभाग खाद्य पदार्थों के जरिए हानिकारक धातुएं शरीर में पहुंचने से लीवर, किडनी फेलियर, फूड पॉइजनिंग, पेट में अल्सर और लंबे समय में कैंसर तक हो सकता है। खासकर कैडमियम लंबे समय तक संपर्क में रहने से किडनी को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए सिर्फ चमक देखकर शुद्धता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मिठाई लेते समय बिल जरूर लें, चटख रंग वाली मिठाई से बचें, खोवा की मिठाई हाथ से तोड़ने पर अगर ज्यादा चिकनी और सफेद लगे तो सतर्क हो जाएं। लोग उन्हें खाकर गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। पर्व त्योहारों में मिलावटखोरों के कारण लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। इसपर विभागीय कार्रवाई जरूरी है। मिठाइयों में घातक रसायनों का इस्तेमाल सिंथेटिक खोवा और मावा तैयार करने में स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड, पाम ऑयल, वनस्पति घी, आलू, अरारोट और यूरिया का प्रयोग हो रहा है। सफेदी और वजन बढ़ाने के लिए यूरिया, कॉस्टिक सोडा और शैंपू जैसे इमल्सीफायर वाला सिंथेटिक दूध इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां बिकने वाले पीले लड्डू में मेटानिल यलो और रोडामिन-बी, तथा जलेबी में ऑरामीन जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग हो रहा है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को बुलाते हैं। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी गुलाब लकड़ा ने कहा कि पिछले महीने में 50 जगहों पर अभियान चलाकर 27 नमूने इकट्ठे कर भेजे गए हैं और हाल ही में 12 किलो अखाद्य रंग से बनी जलेबी भी नष्ट कराई गई है। मिठाई दुकानों की नियमित जांच की जाती है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर में भेजे गए 27 नमूनों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। तीन महीने पहले के भेजे गए 9 नमूनों की रिपोर्ट आ गई है, जिसमें सबस्टैंडर्ड मिलने पर कार्रवाई के लिए उपसमाहर्ता के पास भेजा गया है। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई की जगह दे रहे सफाई
भास्कर एक्सक्लूिसव
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