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गुमला के किसान परिवार से निकली अनीता केरकेट्टा आज पलामू में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) में जिला कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में कार्यरत अनीता करीब 2.63 लाख महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं. वर्ष 1999 से ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सक्रिय अनीता महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मशरूम उत्पादन, सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार से जोड़ रही हैं. उनके नेतृत्व में जिले की करीब 50 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. उनका संघर्ष और सफलता आज हजारों बेटियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है.
पलामू : बेटियां आज किसी भी स्केटर के पीछे नहीं है. हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है. वहीं अगर बात करे तो एक बेटी आगे बढ़कर जब कई बेटियों का जिंदगी संवारती है तो ये और भी खास हो जाता है. इन्हीं में से एक झारखंड के गुमला जिले के एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर पलामू की लाखों महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनीता केरकेट्टा आज महिला सशक्तिकरण की मजबूत पहचान बन चुकी हैं.
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) में पलामू की जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) के रूप में कार्यरत अनीता जिले की करीब 2.63 लाख महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं. उनका सफर संघर्ष, शिक्षा और समाज सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण है.
किसान परिवार की बेटी ने कठिन परिस्थितियों में पूरी की पढ़ाई
अनीता केरकेट्टा ने लोकल18 को बताया कि गुमला जिले के टुडू गांव की रहने वाली हैं. वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. उनके माता-पिता किसान थे और स्वयं कभी स्कूल नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने शिक्षा का महत्व समझते हुए अपने सभी बच्चों को पढ़ाया. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. आगे कहा कि कॉन्वेंट स्कूल, गुमला से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद संत जेवियर्स कॉलेज से इंटरमीडिएट, स्नातक और ग्रामीण विकास विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने विकास और आजीविका के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया.
1999 से ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कर रहीं काम
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 1999 से विकास क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की. शुरुआत से ही उनका फोकस ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर रहा. उन्होंने विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर गांवों में आजीविका आधारित योजनाओं पर काम किया और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए. वर्तमान में JSLPS के माध्यम से वह पलामू के दूर-दराज और पिछड़े गांवों का नियमित दौरा कर महिलाओं की जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार कराने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रही हैं.
‘लखपति दीदी’ अभियान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर
अनीता केरकेट्टा के नेतृत्व में पलामू में महिला स्वयं सहायता समूहों का दायरा लगातार बढ़ा है. जिले में अब तक करीब 50 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. कृषि, पशुपालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं. उन्होंने आगे कहा कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. उनकी जीवन यात्रा आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं.
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8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …
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