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झारखंड हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के बाद खारिज कर दी। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि लोकायुक्त के पास केंद्रीय एजेंसियों (जैसे सीबीआई या महालेखाकार) को जांच का निर्देश देने की शक्ति नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकायुक्त द्वारा अपने ही भाई से जुड़े मामले में निर्णय देना पक्षपात की श्रेणी में नहीं आता, बशर्ते निर्णय कानून के अनुसार और आवश्यकता के सिद्धांत के तहत लिया गया हो। इस मामले में याचिकाकर्ता सत्यदेव राय ने तत्कालीन लोकायुक्त अमरेश्वर सहाय के 30 अप्रैल 2012 के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने लोकायुक्त पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने भाई ज्योति कुमार के खिलाफ शिकायत का निस्तारण स्वयं किया, जबकि कानून के तहत उन्हें यह अधिकार किसी अन्य अधिकारी को सौंपना चाहिए था। याचिकाकर्ता ने ज्योति के खिलाफ सीबीआई या महालेखाकार कार्यालय से जांच कराने का अनुरोध किया था। उनका आरोप था कि रांची विवि के कोष में करोड़ों रुपए के घोटाले में ज्योति कुमार की संलिप्तता थी, लेकिन जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी की। लोकायुक्त ने 30 अप्रैल 2012 को याचिकाकर्ता की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके पास केंद्रीय एजेंसियों को जांच का निर्देश देने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लोकायुक्त केवल राज्य सरकार के अधिकारियों या एजेंसियों को जांच का निर्देश दे सकते हैं, वह भी राज्य सरकार की सहमति से।
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