पश्चिम बंगाल की राजनीति में जादवपुर यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर लगाए जा रहे ‘आजादी’ के नारों और देशविरोधी गतिविधियों को लेकर कड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले वामपंथी शासन और बाद में तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान जादवपुर यूनिवर्सिटी के कैंपस में ऐसी सोच को बढ़ावा मिला. रक्षा बंधन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी को कभी उत्कृष्टता का केंद्र माना जाता था, लेकिन समय के साथ कैंपस में राष्ट्रवादी कार्यक्रमों के खिलाफ माहौल बनाया गया. उन्होंने दावा किया कि इसके चलते विश्वविद्यालय में ‘देशविरोधी सोच’ को जगह मिली.
‘आजादी’ के नारों पर सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में लगाए जा रहे ‘आजादी’ के नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर छात्र किस तरह की आजादी की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब देश में नौकरी, शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, तब कुछ समूह इन मुद्दों पर आवाज उठाने के बजाय ‘आजादी’ के नारे लगा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘क्या आप गांजा और हेरोइन का नशा करने की “आज़ादी” चाहते हैं? क्या आप इसी तरह की आजादी की मांग कर रहे हैं?’
उन्होंने छात्रों को रैली में ले जाने और उन्हें धमकाए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया. अधिकारी ने कहा कि छात्रों को कथित रूप से हॉस्टल से जबरन निकालकर चे ग्वेरा के नाम पर आयोजित रैली में ले जाया गया और इसमें शामिल नहीं होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंकवाद का भी किया जिक्र
सुवेंदु अधिकारी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी कथित ‘आजादी’ समर्थक समूहों को घेरा. उन्होंने कहा कि जब आतंकवादी भारतीय जवानों पर हमला करते हैं या पहलगाम जैसी घटनाओं में लोगों की जान जाती है, तब ऐसे समूह विरोध मार्च नहीं निकालते. उन्होंने दावा किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यही समूह शांति मार्च निकालने लगे.
उन्होंने ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारों को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी और कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब दिया है.
‘किशनजी’ के समर्थन में नारे लिखने पर भी निशाना
सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के समर्थन में कथित तौर पर लिखे गए ‘रेड सैल्यूट किशनजी’ का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि किशनजी भारतीय संविधान में विश्वास नहीं रखने वाला व्यक्ति था. अधिकारी ने दावा किया कि वह जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस से ऐसी विचारधाराओं को खत्म करने के लिए कदम उठाएंगे.
हॉस्टल और ड्रग्स को लेकर भी सख्त रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के हॉस्टल में लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने की व्यवस्था को भी खत्म किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर चुके पूर्व छात्र हॉस्टल में कब्जा बनाए न रख सकें. इसके साथ ही उन्होंने कैंपस में नशीले पदार्थों के सेवन को पूरी तरह खत्म करने की बात कही. अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर को ऐसी गतिविधियों से मुक्त करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है.
‘बंगाल में उठी राष्ट्रवादी लहर’
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवादी लहर उठ रही है और इसका असर जादवपुर यूनिवर्सिटी पर भी दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर देशविरोधी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी तरह जादवपुर यूनिवर्सिटी को भी ऐसी ताकतों से मुक्त किया जाएगा.
अधिकारी के इस बयान के बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी में विचारधारा, छात्र राजनीति, कैंपस की आजादी और राष्ट्रवाद को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत में नया विवाद खड़ा होने के आसार हैं. (IANS इनपुट के साथ)