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क्या होता है प्रायश्चित पूजन, आखिर क्यों राम मंदिर में शुरू हुआ...


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What Is Prayaschit Pujan: इस विषय पर जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि प्रायश्चित पूजन एक नहीं बल्कि कई प्रकार का होता है. अलग-अलग प्रकार के दोष और अपराधों के लिए अलग-अलग वैदिक विधान निर्धारित किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर गौहत्या, चोरी, नियमों का उल्लंघन या अन्य धार्मिक दोषों के लिए अलग-अलग प्रायश्चित विधियां बताई गई हैं.

अयोध्या: राम मंदिर में इन दिनों 10 दिवसीय प्रायश्चित पूजन और वैदिक अनुष्ठान जारी है. मंदिर में रामलला की नियमित पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं के दर्शन पहले की तरह सुचारु रूप से चल रहे हैं.लेकिन इसके साथ ही वैदिक आचार्यों द्वारा विशेष प्रायश्चित अनुष्ठान भी कराया जा रहा है.इस अनुष्ठान का उद्देश्य किसी भी प्रकार की ज्ञात या अज्ञात त्रुटि, दोष या नियम-भंग के लिए भगवान से क्षमा याचना करना तथा धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुद्धि और मंगल की कामना करना बताया जा रहा है. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं आखिर क्या होता है प्रायश्चित पूजन?

दरअसल सनातन धर्म में प्रायश्चित का विशेष महत्व माना गया है “प्रायश्चित” का अर्थ है अपने द्वारा हुई भूल या अनुचित कर्म के लिए पश्चाताप करना होता है.ईश्वर से क्षमा मांगना और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने का संकल्प लेना. धर्मशास्त्रों में यह माना गया है कि यदि किसी कारणवश कोई दोष उत्पन्न हो जाए, तो वैदिक विधि से प्रायश्चित करने पर उस दोष का निवारण किया जाता है.

इस विषय पर जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि प्रायश्चित पूजन एक नहीं बल्कि कई प्रकार का होता है. अलग-अलग प्रकार के दोष और अपराधों के लिए अलग-अलग वैदिक विधान निर्धारित किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर गौहत्या, चोरी, नियमों का उल्लंघन या अन्य धार्मिक दोषों के लिए अलग-अलग प्रायश्चित विधियां बताई गई हैं.

पंडित कल्कि राम के अनुसार राम मंदिर में जो 10 दिवसीय प्रायश्चित अनुष्ठान चल रहा है, उसका संबंध मंदिर में सामने आए चोरी के प्रकरण के बाद धार्मिक दृष्टि से दोष निवारण और क्षमा याचना से जोड़ा जा रहा है. उनका कहना है कि जब किसी पवित्र स्थान पर इस प्रकार की घटना होती है तब शास्त्रों के अनुसार वैदिक अनुष्ठान कर भगवान से क्षमा प्रार्थना की जाती है और मंदिर परिसर की आध्यात्मिक शुद्धि का विधान किया जाता है.

इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूजन, देव आवाहन, शांति पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. इनका उद्देश्य मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक पवित्रता और मंगलमय वातावरण की स्थापना करना माना जाता है.इस विशेष अनुष्ठान के बीच रामलला के दर्शन, आरती और दैनिक पूजा व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है.श्रद्धालु पहले की तरह नियमित रूप से भगवान रामलला के दर्शन कर रहे हैं और मंदिर की सभी धार्मिक गतिविधियां निर्धारित समय के अनुसार संचालित हो रही हैं.

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि प्रायश्चित केवल दंड का विषय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्ममंथन की प्रक्रिया है. इसका मूल उद्देश्य अपनी भूल स्वीकार करना, ईश्वर से क्षमा मांगना और धर्म के मार्ग पर पुनः दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना है. इसी भावना के साथ राम मंदिर में 10 दिवसीय प्रायश्चित पूजन और वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है.

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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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