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NEET 2026 Success Story: पाली जिले के आदित्य ने RE-NEET 2026 में अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से सभी को प्रेरित किया. छत से गिरने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा. शारीरिक तकलीफ के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और लंबी यात्रा के दौरान उन्होंने कार में आराम करते हुए परीक्षा दी. कठिन परिस्थितियों के बीच भी डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा और अपने जज्बे से मिसाल कायम की. आदित्य की संघर्षपूर्ण सफलता यह संदेश देती है कि मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है.
पाली। संघर्ष और हौसलों की कहानियां आपने अक्सर सुनी होंगी, मगर राजस्थान के पाली जिले में आने वाले सोजत के एक लाल की कहानी ऐसी है, जिसे पढ़कर और सुनकर शायद आपकी आंखों में आंसू आ जाएं. यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि हकीकत है एक ऐसे जांबाज की, जिसने नियति के सबसे क्रूर प्रहार को अपने फौलादी इरादों से परास्त कर दिया. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी नीट यूजी 2026 के परीक्षा परिणामों में पाली के सोजत तहसील के बूटेलाव गांव निवासी आदित्य वैष्णव ने व्हीलचेयर पर रहते हुए न केवल देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षा पास की, बल्कि साबित कर दिया कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो शारीरिक लाचारी भी रास्ता नहीं रोक सकती.’
पाली जिले के सोजत क्षेत्र के छोटे से गांव बूटेलाव में एक छोटी सी जनरल स्टोर चलाने वाले जितेंद्र वैष्णव और गृहणी सुमित्रा वैष्णव के घर जन्मा आदित्य बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल था. आँखों में डॉक्टर बनकर देश की सेवा करने का सपना लिए आदित्य ने सोजत से ही अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की. घर की माली हालत सामान्य होने के बावजूद परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा एक दिन उनका नाम रोशन करेगा. लेकिन किसे पता था कि 12वीं पास करने के बाद जोधपुर बासनी स्थित अपने ननिहाल गए आदित्य की जिंदगी में एक ऐसा काला दिन आने वाला है, जो सब कुछ तहस-नहस कर देगा. 11 दिसंबर 2024 को दो मंजिला मकान की छत पर टहलते समय अचानक पैर फिसलने से आदित्य नीचे गिर गया और इस खौफनाक हादसे ने उसकी हंसती-खेलती जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया.
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और जिंदगी भर का गहरा जख्म
छत से गिरने के कारण आदित्य के पैर की हड्डियां और रीड की हड्डी बुरी तरह क्रैक हो गई थी. गंभीर हालत में उसे तुरंत जोधपुर एम्स हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 14 दिसंबर 2024 को डॉक्टरों ने उसका एक बड़ा ऑपरेशन किया. ऑपरेशन तो सफल रहा, लेकिन अनहोनी को कुछ और ही मंजूर था. इस हादसे के कारण आदित्य के कमर के नीचे के हिस्से ने हमेशा के लिए काम करना बंद कर दिया. मेडिकल की भाषा में इसे ‘स्पाइनल कॉर्ड इंजरी’ कहते हैं. इस हादसे ने आदित्य को हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर ला दिया और परिवार को जिंदगी भर का ऐसा गम दे दिया, जिसकी भरपाई नामुमकिन थी.
10 महीने का कड़ा इलाज, पैरों के साथ छूट गया था साथ
ऑपरेशन के बाद का समय आदित्य और उसके पूरे परिवार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. करीब 10 महीने तक आदित्य लगातार डॉक्टरों की कड़ी देखरेख में रहा. दिन में कई-कई बार होने वाली दर्दनाक फिजियोथेरेपी और दवाइयों के दौर के बीच उसका इलाज लंबा खिंचता चला गया. स्थिति आज भी यह है कि आदित्य बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता. चलने-फिरने की उम्र में एक ही जगह बिस्तर और व्हीलचेयर पर सिमट जाना किसी भी युवा को अवसाद (डिप्रेशन) के गहरे दलदल में धकेलने के लिए काफी था, लेकिन आदित्य के भीतर कुछ और ही चल रहा था.
डिप्रेशन को हराया और कार में सोकर देने पहुंचे परीक्षा
इतने बड़े शारीरिक और मानसिक आघात के बाद भी इस वीर ने हार नहीं मानी. आदित्य ने व्हीलचेयर को अपनी लाचारी नहीं, बल्कि अपना हथियार बना लिया. उसने डिप्रेशन को खुद पर हावी नहीं होने दिया और बिस्तर पर लेटे-लेटे ही नीट की तैयारी जारी रखी. जब नीट का एग्जाम नजदीक आया, तो मुश्किलें और बढ़ गईं क्योंकि वह सीधा बैठ भी नहीं सकता था. परीक्षा के दिन परिजन उसे कार की पिछली सीट पर सुलाकर परीक्षा केंद्र तक लेकर गए और परीक्षा खत्म होने के बाद उसी हालत में वापस लाए. दर्द और विपरीत परिस्थितियों के बीच दी गई यह परीक्षा सिर्फ सवालों के जवाब की नहीं, बल्कि उसके जज्बे की परीक्षा थी.
ऑल इंडिया 9483 रैंक के साथ पूरा हुआ डॉक्टर बनने का सपना
आखिरकार आदित्य की यह हाड़-तोड़ मेहनत और कभी न टूटने वाला हौसला रंग लाया. जब गुरुवार देर रात एनटीए ने नीट 2026 का परिणाम घोषित किया, तो आदित्य ने ऑल इंडिया में 9483वीं रैंक हासिल कर पूरे देश को चौंका दिया. जैसे ही रिजल्ट स्क्रीन पर आया, सोजत के बूटेलाव गांव में खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बेटे की इस ऐतिहासिक और अविश्वसनीय सफलता को देखकर माता-पिता और छोटी बहन जिज्ञासा की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. आदित्य की यह सफलता आज देश के उन लाखों युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है जो छोटी-मोटी परेशानियों से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं.
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Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें