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वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर पत्र लिखा है। अस बार कैबिनेट विभाग की अपर मुख्य सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने कुछ अफसरों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा कि संसदीय कार्य मंत्री के रूप में मुझे लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। कुछ अधिकार संवेदनशील हैं तो कुछ निर्देश को नहीं मानते। अनुपालन तो दूरी, कुछ ऐसे भी अधिकारी हैं, जिनका व्यवहार अहंकार भरा है। यह संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने लिखा कि राज्य व केंद्र द्वारा शिष्टाचार से संबंधित बिंदुओं पर जारी किए गए परिपत्रों का कठोरता से अनुपालन कराया जाए। क्योंकि लोकतंत्र बचेगा तो प्रणाली भी बचेगी। अगर संसदीय व्यवस्था व मान्यता पर कुठाराघात हुआ तो विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरी बढ़ेगी। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक होगा। फोन रिसीव नहीं करते अफसर, मोबाइल स्विच ऑफ रखते हैं
उन्होंने लिखा कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों का फोन रिसीव नहीं करते। कई बार मोबाइल का स्विच ऑफ भी मिलता है। वे इनके पत्रों और सुझावों का भी जवाब नहीं देते। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने अधिकारियों के लिए पांच महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इनमें जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना, उनकी बातों को सुनना, नियमों के अनुरूप समय पर कार्रवाई करना, मोबाइल बंद नहीं रखना और कॉल रिसीव न कर पाए तो बाद में कॉल बैक करना। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
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