बोकारो: खरीफ का मौसम किसानों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण खेती का समय माना जाता है. इस मौसम में धान, मक्का, अरहर, सोयाबीन समेत कई प्रमुख फसलों की बुवाई होती है, लेकिन अच्छी पैदावार का सपना अक्सर खेतों में उगने वाले खरपतवार बिगाड़ देते हैं. क्योंकि खरपतवार पानी, खाद, धूप और पोषक तत्वों जमीन से सोखते है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. आइये आज इसके उपाय के बारे में जानते हैं.
बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र पेटरवार की कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुषमा ने किसानों को 5 प्रमुख खरपतवारों के बारे में जानकारी दी, जो खरीफ सीजन में सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि समय रहते इनकी पहचान और नियंत्रण कर लिया जाए तो फसल की उपज और किसानों की आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं. इससे खेती में बंपर पैदावार की जा सकती है.
जानें सबसे खतरनाक खरपतवार
डॉ. सुषमा के अनुसार, सबसे पहला मोथा घास है. जो खरीफ सीजन का सबसे जिद्दी खरपतवार माना जाता है. इसकी जड़ों में गांठनुमा कंद बन जाते हैं, जिससे इसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होता है. कई किसान केवल ऊपर की पत्तियों पर खरपतवारनाशी का छिड़काव करते हैं, जिससे पत्तियां तो सूख जाती हैं, लेकिन जमीन के अंदर मौजूद कंद सुरक्षित रह जाते हैं और कुछ ही दिनों में दोबारा नई घास उग आती है. ऐसे में इससे स्थायी रूप से छुटकारा पाने के लिए खेत की गहरी जुताई कर जड़ों और कंदों को निकालकर नष्ट करना जरूरी है.
जानें दूसरा खतरनाक खरपतवार
दूसरा सवा घास है, जो मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसल में दिखाई देती है. इसके तने काफी कठोर होते हैं और इसकी बालियां रागी जैसी दिखती हैं. यह फसल के साथ पोषक तत्व और नमी का उपयोग करती है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है और इसके नियंत्रण के लिए किसान धान की रोपाई के बाद खरपतवारनाशी दवा छिड़काव कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं.
तीसरा है ये खरपतवार
तीसरा गाजर घास है. जो खेतों के साथ-साथ सड़क किनारे और खाली जमीनों पर भी तेजी से फैलती है. इसके सफेद फूल आने के बाद इसके बीज हवा के जरिए दूर-दूर तक फैल जाते हैं, जिससे इसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो जाता है. यह न केवल फसल के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इंसानों में एलर्जी, चर्म रोग और अस्थमा जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है. इसलिए फूल आने से पहले ही गाजर घास को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए.
जानें चौथी खरपतवार
इसके अलावा दूधी घास भी किसानों के लिए बड़ी समस्या है. यह लगभग पूरे साल बड़ी पैमाने पर खेतों में उगती रहती है और लगातार मिट्टी से पोषक तत्व और नमी सोखती रहती है, जिससे फसल का विकास प्रभावित होता है. ऐसे में समय पर इसे नहीं हटाया जाए तो यह खेत की उर्वरता पर भी असर डाल सकती है.
ये है पांचवी सबसे खतरनाक खरपतवार
वहींं, जंगली चौलाई भी खरीफ की कई फसलों में तेजी से फैलने वाला खरपतवार है. जो बहुत हि तेजी से फैलती है और इसे मौजूद कांटेदार पौधे पूरे खेत में फैल जाते है और पोषक तत्वों को सोखते है और उत्पादन में कमी लाती है इसलिए इसकी शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर इसे खेत से निकाल देना चाहिए.