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देहरादून के जाख़न, मेहुवाला और सहस्त्रधारा रोड की सड़कें कभी गड्ढे मुक्त कैसे होंगी. देहरादून के निवासी मुकेश शर्मा ने कहा है कि पिछले 10 सालों में देहरादून की सड़कों के गड्ढे भरने में सरकारे नाकाम रहती हैं और अब तो तारकोल के न मिलने का बहाना मिल गया है. उन्होंने कहा कि हर 6 महीने में सड़कों का काम होता रहना चाहिए, सभी विभाग मिलकर सड़कों को दुरुस्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा वाहन चालकों को सड़कों के गड्ढे से दिक्कत होती है.
देहरादूनः 15 मई तक राज्यभर में सड़कों के गड्ढे भरने का अभियान चलाया जाता है लेकिन मानसून से पहले इस बार सड़कों के गड्ढे भर नहीं पाएंगे क्योंकि जंग की वजह से सड़क बनाने में उपयोग होने वाला तारकोल और इमल्सन महंगा हो गया है. इससे उत्तराखंड में 277 सड़कों के डामरीकरण का काम अटक गया है. ठेकेदारों की ओर से मांगी खरीद से हाथ खड़े करने के बाद अबलोनिवि ने शासन को तारकोल की दर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है.
10 साल से नहीं भर पाए सड़क के गढ्ढे
ऐसे में देहरादून के जाख़न, मेहुवाला और सहस्त्रधारा रोड की सड़कें कभी गड्ढे मुक्त कैसे होंगी. देहरादून के निवासी मुकेश शर्मा ने कहा है कि पिछले 10 सालों में देहरादून की सड़कों के गड्ढे भरने में सरकारे नाकाम रहती हैं और अब तो तारकोल के न मिलने का बहाना मिल गया है. उन्होंने कहा कि हर 6 महीने में सड़कों का काम होता रहना चाहिए, सभी विभाग मिलकर सड़कों को दुरुस्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा वाहन चालकों को सड़कों के गड्ढे से दिक्कत होती है.
वही पैदल चलने वाले लोग भी इससे परेशान होते हैं. मुकेश ने कहा है कि हम अपने घरों में जो पदार्थ इस्तेमाल करते हैं घर सालों साल चलते हैं लेकिन सड़के एक ही बारिश में टूटकर बह जाती है, इसका मतलब यह है हम जो पदार्थ लग रहे हैं वह खराब क्वालिटी का है. उन्होंने कहा कि रेलवे के नजदीक उद्घाटन के दो-तीन दिन बाद ही बनाई गई सड़क टूट गई. उन्होंने कहा मरीज और बुजुर्ग अगर ऑटो में जाते हैं सड़कों के गड्ढे रहते हैं तो उन्हें बहुत तरह की समस्या होती है इसीलिए सड़कों को दुरुस्त किया जाना चाहिए.
45 हजार से 78 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन हुई तारकोल की कीमत
लोक निर्माण विभाग के विभाग अध्यक्ष राजेश शर्मा ने जानकारी दी कि वैश्विक स्तर पर संघर्ष चल रहा है जिसके चलते क्रूड ऑयल महंगा हुआ है.इसका असर सड़क निर्माण में उपयोग लाने वाली सामग्री में भी देखने को मिला जहां मार्च के महीने में इसकी कीमत बढ़ गई है. सड़कों के पेचवर्क और निर्माण के लिए डामर में तारकोल इस्तेमाल होता है जिसे बिटूमिन भी कहा जाता है. उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ महीने पहले यानि मार्च में इसके दाम अचानक 45 हजार से 78 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में बाधा न आए इसलिए नियमों में शिथिलता लाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. मिली जानकारी के अनुसार लगभग 277 सड़कों को बनाने के लिए लगभग 17 हजार मेट्रिक टन तारकोल के साथ ही इम्लसन की 2 हजार मेट्रिक टन की जरूरत होगी. कीमतें बढ़ने से थोड़ा काम प्रभावित होगा. नई कीमतों के साथ शासन को प्रस्ताव भेजा गया है ताकि सड़क निर्माण कार्य समय पर हो सकें.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें