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खेती से बढ़ानी है कमाई? रबी सीजन में लगाएं ये 5 कंद...


बहराइच: रबी फसलों की बुवाई का सीजन शुरू हो चुका है. ऐसे में जो किसान पारंपरिक खेती से कम समय और लागत में बेहतर मुनाफा कमाना चाहते हैं, उनके लिए कंद वाली सब्जियों की खेती बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रबी सीजन में चुकंदर, गाजर, मूली, आलू और शलजम जैसी कंद वाली सब्जियों की उन्नत किस्मों की सही तरीके से बुवाई करने पर किसान प्रति एकड़ अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. ​आइए जानते हैं इन प्रमुख कंद वाली सब्जियों की खेती का सही समय, बीज दर, पौध दूरी और अनुमानित उपज से जुड़ी संपूर्ण जानकारी.

चुकंदर की खेती में अगर बात की जाए हाइब्रिड किस्मों को तो इसमें लगभग 200 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है. इसके अलावा ​स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी चुकंदर की खेती किसानों के लिए काफी मुनाफे का सौदा भी माना जाता है. इसमें ​उन्नत किस्में, क्रिमसन ग्लोब और डेट्रॉइट डार्क रेड है. जिसकी खेती नवंबर के प्रथम सप्ताह तक बुवाई का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. इसमें छिद्र रोपण विधि से 2 से 4 किग्रा बीज प्रति एकड़ लगता है और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 से 70 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखनी चाहिए. उपज की बात करें तो ​सामान्य किस्मों से 80 क्विंटल और संकर हाइब्रिड किस्मों से 200 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज मिलती है.

सब्जियों में गाजर की खेती

​सर्दियों के मौसम में गाजर की मांग बाजार में काफी अधिक रहती है. पूसा केसर, पूसा रुधिरा, पूसा वसुधा और पूसा वृष्टि. ​को हमारे किसान भाई लगा सकते हैं और इसकी खेती अक्टूबर के अंत से नवंबर के पहले सप्ताह तक कर सकते है. इसमें संकर किस्मों के लिए 2 से 3 किग्रा बीज प्रति एकड़ लगता है. पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी हमारे किसान भाई रख सकते है. जिसमें ​उपज दिसंबर से मार्च के बीच कटाई के बाद 80 से 120 क्विंटल प्रति एकड़ या उससे अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

कन्द सब्जियों में मूली भी शामिल

​कम समय में तैयार होने वाली मूली की फसल किसानों को जल्दी नकद आय देती है. इसमें पूसा चेतकी, पूसा रेशमी, चाइनीज पिंक और काशी हंस उन्नत किस्म के बीच शामिल है. इसकी बुवाई का उचित समय नवंबर महीना माना जाता है. इसमें बीज दर मात्र 1 किग्रा बीज प्रति एकड़ की जरूरत होती है. पंक्ति से पंक्ति 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी रखें. ​जनवरी से अप्रैल तक बाजार में आने वाली इस फसल से औसतन 120 क्विंटल प्रति एकड़ उपज मिलती है.

सब्जियों का राजा आलू की भी खेती करें

​सब्जियों का राजा कहा जाने वाला आलू रबी की मुख्य कंद फसल है. जिसमें उन्नत किस्में कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी ज्योति, कुफरी बहार और कुफरी चिप्सोना शामिल है इसका बुवाई का समय सितंबर से दिसंबर के बीच का होता है और इसमें बीज दर व दूरी प्रति एकड़ 12 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है. कंद को 8 से 10 सेमी गहराई पर रोपें. पंक्ति की दूरी 45 सेमी और पौधे की दूरी 25 सेमी रखें.​इसमें जनवरी से मार्च तक कटाई होने पर 80 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक पैदावार मिलती है.

अब बात शलजम को लेकर

​कम लागत और अच्छी बाजार मांग के कारण शलजम की खेती भी किसान आसानी से कर सकते हैं.​इसमें हमारे किसान भाई पर्पल टॉप व्हाइट ग्लोब बीच का चयन कर सकते हैं. इसका ​बुवाई का सही समय नवंबर का महीना का है.इसमें ​बीज दर व दूरी, 1 से 1.5 किग्रा बीज प्रति एकड़. पंक्ति से पंक्ति 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखनी चाहिए. इस तरह शलजम की खेती कर के किसान भाई दिसंबर से मार्च तक कटाई करने पर 120 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज प्राप्त होती है.

​विशेषज्ञों की सलाह

बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह द्वारा कंद वाली फसलों की बुवाई के समय खेत की गहरी जुताई और उचित जल निकासी का प्रबंध बेहद जरूरी है. इसके साथ ही बीजों को 1 से 2 सेमी की गहराई पर ही बोएं ताकि अंकुरण बेहतर हो और कंदों का विकास सही तरीके से हो सके.



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