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खेत की बाउंड्री पर सागवान, बीच में मौसंबी…हिट हुआ पलामू में खेती...


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खेत की बाउंड्री पर सागवान, बीच में मौसंबी, हिट हुआ खेती का ‘डबल इनकम’ फार्मूला

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4 एकड़ जमीन पर खेती का यह अनोखा मॉडल विकसित किया है. उन्होंने बताया कि खेत की चारों ओर सागवान लगाने का उद्देश्य भविष्य में लकड़ी से अच्छी कमाई करना है. वहीं, खेत के बीच में करीब 800 नटाल प्रजाति के मौसमी के पौधे लगाए गए हैं. पौधों के बीच बची खाली जगह को भी खाली नहीं छोड़ा गया है.

पलामू: आज के समय में किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. इससे कम जमीन में भी अच्छी कमाई की जा सकती है. झारखंड के पलामू जिले के एक प्रगतिशील किसान ने 4 एकड़ जमीन पर खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आने वाले वर्षों में लाखों रुपये की आमदनी का जरिया बन सकता है. किसान ने खेत की पूरी बाउंड्री पर टिशू कल्चर वाले सागवान के दोहरे पौधे लगाए हैं. वहीं, खेत के बीच वाले हिस्से में व्यावसायिक उद्देश्य से मौसमी का बाग तैयार किया है. इस मॉडल में एक ही खेत से फल और लकड़ी, दोनों से आय प्राप्त करने की योजना बनाई गई है.

सागवान और मौसमी का अनोखा संयोजन
बसना गांव के किसान सतीश दुबे ने 4 एकड़ जमीन पर खेती का यह अनोखा मॉडल विकसित किया है. उन्होंने बताया कि खेत की चारों ओर सागवान लगाने का उद्देश्य भविष्य में लकड़ी से अच्छी कमाई करना है. वहीं, खेत के बीच में करीब 800 नटाल प्रजाति के मौसमी के पौधे लगाए गए हैं. पौधों के बीच बची खाली जगह को भी खाली नहीं छोड़ा गया है. वहां दूसरी फसलों की खेती की जा रही है. इससे जमीन का बेहतर उपयोग हो रहा है. साथ ही अतिरिक्त आय का भी रास्ता खुल रहा है.

नागपुर से लाए टिशू कल्चर के पौधे
सतीश दुबे ने बताया कि बेहतर गुणवत्ता और तेज बढ़वार के लिए वे विशेष रूप से नागपुर गए थे. वहां की ग्रीन नर्सरी से टिशू कल्चर वाले सागवान के पौधे खरीदे. उनका कहना है कि इन पौधों की बढ़वार सामान्य पौधों की तुलना में काफी तेज होती है. इनकी ऊंचाई भी अधिक होती है. भविष्य में इनकी लकड़ी की बाजार में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है.

पलामू का मौसम सिट्रस फसलों के लिए अनुकूल
उन्होंने बताया कि पलामू का मौसम सिट्रस यानी खट्टे फलों की खेती के लिए काफी अनुकूल माना जाता है. इसी वजह से उन्होंने नटाल प्रजाति की मौसमी का चयन किया. यह किस्म अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. उन्होंने बताया कि आगे चलकर वे नींबू का बाग भी लगाने की तैयारी कर रहे हैं. इससे उत्पादन और आय, दोनों में बढ़ोतरी होगी.

5 से 7 लाख रुपये की लागत
सतीश दुबे ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब तक लगभग 5 से 7 लाख रुपये का खर्च आया है. उनका दावा है कि पौधे पूरी तरह तैयार होने के बाद करीब पांच साल में केवल मौसमी की फसल से ही एक सीजन में 15 से 16 लाख रुपये तक की आमदनी होने लगेगी. इसके अलावा, सागवान के पेड़ परिपक्व होने के बाद उनकी लकड़ी से भी लाखों रुपये की अलग आय होगी. इस तरह एक ही खेत से दो अलग-अलग स्रोतों से कमाई होगी.

जैविक खेती और पौधों से विशेष लगाव
उन्होंने बताया कि वे पूरी खेती जैविक तरीके से कर रहे हैं. पौधों की देखभाल के लिए केवल देसी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग किया जाता है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. सतीश दुबे ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पौधों और बागवानी का शौक रहा है. वे जहां भी जाते हैं, वहां की नई खेती तकनीकों और पौधों की जानकारी जुटाते हैं. इसके बाद उन्हें अपने खेत में अपनाने की कोशिश करते हैं. उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और जैविक खेती का मेल किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी और टिकाऊ तरीका है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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