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Kusum Farming Benefits: पलामू में नीलगाय की समस्या से परेशान किसानों के लिए कुसुम यानी सैफ्लावर की खेती वरदान साबित हो रही है. कांटेदार होने के कारण जानवर इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. कम पानी में तैयार होने वाली इस रबी फसल से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
पलामू. खेती-किसानी में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कभी मौसम की मार तो कभी जंगली जानवरों के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. खासकर पलामू जिले में नीलगाय किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. नीलगाय खेतों में लगी फसलों को खा जाती है और पौधों को रौंदकर बर्बाद कर देती है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ फसल बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है. लेकिन, एक ऐसी फसल है, जिसकी खेती करके किसान नीलगाय से खेतों को बचाने के साथ अच्छी कमाई भी कर सकते हैं. हम बात कर रहे हैं कुसुम की खेती की, जिसे अंग्रेजी में सैफ्लावर (Safflower) कहा जाता है. इसकी खासियत है कि कांटेदार पौधा होने के कारण नीलगाय और दूसरे जानवर इसे खाना पसंद नहीं करते.
नीलगाय से बचाव के लिए खेत की मेड़ पर भी लगाएं
कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी. एन. सिंह ने बताया कि कुसुम की खेती किसानों के लिए दोहरा लाभ देने वाली साबित हो सकती है. किसान चाहें तो इसकी खेती पूरे खेत में कर सकते हैं या फिर अपने खेत की मेड़ पर इसकी बुआई कर सकते हैं. पौधों में कांटे होने के कारण नीलगाय इससे दूर रहती है. ऐसे में खेत के चारों ओर कुसुम लगाने से दूसरी फसलों को भी बचाने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा किसान इसकी उपज बेचकर आमदनी भी कर सकते हैं.
एक पटवन में भी तैयार हो सकती है फसल
कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल उन किसानों के लिए भी बेहतर विकल्प हो सकती है, जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है. आगे कहा कि कुसुम रबी मौसम की तिलहनी फसल है. इसकी खेती में धान और गेहूं की तुलना में कम पानी की जरूरत पड़ती है. उचित नमी रहने पर किसान इसकी खेती सीमित सिंचाई में कर सकते हैं. एक बार पौधों का अंकुरण और शुरुआती विकास हो जाने के बाद जरूरत के अनुसार एक पटवन में भी फसल तैयार की जा सकती है.
पलामू के लिए A-300 प्रभेद पर दें ध्यान
उन्होंने बताया कि कुसुम की खेती करने वाले किसानों के लिए A-300 प्रभेद एक विकल्प है. पलामू की जलवायु और कम सिंचाई वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किसान इसकी खेती कर सकते हैं. इसके लिए किसान बीज उपचार करना बेहद जरूरी है, ताकि फसल को भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके.
तेल के साथ स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी
उन्होंने कहा कि कुसुम की खेती से किसानों को तिलहन के रूप में भी लाभ मिलता है. इसके बीज से तेल निकाला जाता है. कुसुम के तेल में अच्छी वसा पायी जाती है और संतुलित मात्रा में इसका सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी हो सकता है. इसके तेल का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में भी किया जाता है.
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