सौ बात की एक बात ये कि ये धनतेरस आते ही सोने को क्या हो गया? क्या धनतेरस पर अब सोना ले लेना चाहिए, क्योंकि अब ये फिर से बढ़ने लग जाएंगे? सिर्फ रस्म के लिए नहीं, निवेश के लिए सोना ले लेना चाहिए क्या? अभी कुछ दिन पहले तक तो सारे एक्सपर्ट सोने के दाम गिरने की बात कर रहे थे. ये फिर चढ़ने क्यों लग गए? एक्सपर्ट का आकलन गलत हो गया या धनतेरस पर लोगों ने इतना सोना लेना शुरू कर दिया कि डिमांड बढ़ गई या शादियों के सीजन में मांग बढ़ने से सोने के दाम ऊपर की तरफ जाते दिख रहे हैं? हो क्या रहा है? अचानक मार्केट की चाल बदल क्यों गई? क्या हो गया पिछले कुछ दिनों में?
दरअसल, और कुछ नहीं हुआ अमेरिका में चुनाव हो गया और ट्रंप की पार्टी हार गई. तो उससे सोने के दाम का क्या मतलब? उसको समझने के लिए ये समझना पड़ेगा कि सोने के दाम घट क्यों रहे थे? जनवरी के आस-पास 1.75 लाख को पार कर रहे थे और अक्टूबर आते-आते 1.5 लाख के भी नीचे क्यों आ गये थे? याद है आपको एक्सपर्ट लोग क्या कह रहे थे कि अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड बढ़ गई और जल्दी घटने वाली नहीं मानी जा रही थी. ट्रंप की हार का माहौल बना तो वो यील्ड गिरनी शुरू हो चुकी है. ट्रंप खुद तो नहीं हारे हैं. राष्ट्रपति चुनाव तो दो साल बाद आएगा, लेकिन वहां की संसद के चुनाव में उनकी पार्टी हार गई है और उनकी विपक्षी पार्टी यानी डेमोक्रैटिक पार्टी के पास अब वहां की संसद के दोनों सदनों में बहुमत हो गया है. उससे क्या होगा?
ट्रंप के अब आसान नहीं होगा रास्ता
ट्रंप की पार्टी हारने से ये होगा कि फैसले तो अब भी ट्रंप अपनी मर्जी से ले लकते हैं लेकिन उनको अपने फैसलों के लिए बजट पास करवाना पड़ेगा संसद से. अनुमान ये है कि अब संसद उनके फैसलों के लिए उस तरह से खुला पैसा नहीं देने वाली जैसा उनको पहले मिलने की उम्मीद थी. ये बॉन्ड क्या होता है? बॉन्ड मतलब वो रसीद जो दी जाती है जब कोई उधार लेता है. तो जब कोई सरकार उधार लेती है तो वो भी बॉन्ड जारी करती है. उसमें लिखा होता है कि इतने साल के लिए इतना पैसा ले रहे हैं और उसको इस टाइम पर लौटाएंगे और उस पर इतना ब्याज भी देंगे. सरकार का बॉन्ड मतलब सरकार की गारंटी.
ईरान युद्ध बना गले की फांस
ईरान युद्ध पर ट्रंप डॉलर फूंके जा रहे थे और युद्ध की वजह से तेल भी महंगा हो गया था, क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज़ का रास्ता रोक दिया था. उसकी वजह से महंगाई बढ़ी जा रही थी और ज्यादा डॉलर युद्ध पर खर्च करने के लिए सरकार को या तो टैक्स बढ़ाना पड़ता या फिर बाजार से पैसा उठाना पड़ता. वो और महंगा होता जा रहा था. तो अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ती जा रही थी. यील्ड मतलब क्या? मतलब कि 10 साल के लिए अमेरिका की सरकार को पैसा उधार दे तो ब्याज 5% से भी ज्यादा मिलने लग गया था. जब कोई निवेशक अमेरिकी सरकार को दस साल के लिए पैसे देता है तो उसे जो रिटर्न मिलता है, उसे दस साल की यील्ड कहते हैं. ये दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, क्योंकि अमेरिका की सरकार को उधार दिया आपने ये बॉन्ड उसकी रसीद है. यानी उस पर अमेरिका की सरकार की गारंटी है.
सेफ पैसे देखकर किया अमेरिका में निवेश
अमेरिकी सरकार की गारंटी की वजह से ही बड़े-बड़े निवेशक मतलब देशों के रिजर्व बैंक, बड़ी-बड़ी अंतर्राष्ट्रीय निवेश कंपनियां तो ऐसी ही चीजों में निवेश करना चाहेंगी ना जिनमें पैसा बिलकुल सेफ रहे. अमेरिका की सरकार का बॉन्ड भी ऐसी ही चीज है और उसी वजह से बैंक और ये कंपनियां सोने में निवेश करती हैं, क्योंकि वो भी बिलकुल सेफ होता है. लेकिन सोने पर कोई ब्याज तो मिलता नहीं. अमेरिका की सरकार के बॉन्ड पर तो ब्याज भी मिलता है और ये बाजार में आसानी से बेचा भी जा सकता है जब चाहो. उसका रेट ऊपर-नीचे होता रहता है लेकिन ब्याज भी मिलता है और वो ब्याज भी मिलता है डॉलरों में. तो जब ये बॉन्ड ही 5% की रिटर्न देने लग गया तो ये बड़े-बड़े निवेशक बॉन्ड लेने लग गए थे, सोना लेने के बजाय. ये हमारे आपके धनतेरस और शादियों में सोना कम लेने या ज्यादा लेने से इतना कोई फर्क नहीं पड़ता डिमांड पर कि दाम बहुत ऊपर नीचे हो जाएं.
बड़े निवेशक तय करते हैं सोने का भाव
ये तो बड़े-बड़े बैंक और निवेश कंपनियां और पेंशन फंड होते हैं जो सोने के बजाय कहीं और पैसा लगाने लग जाएंगे तब दाम गिरते हैं या ये सोना लेने लग जाएं तब दाम बढ़ते हैं. ये निवेशक तो टनों में सोना लेते हैं. यानी जब अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है तो इसका मतलब हुआ कि सुरक्षित जगह पर ज्यादा रिटर्न मिल रहा है. तो ये बड़े-बड़े निवेशक सोने में लगाया पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगाने लगते हैं. यही ये लोग करने लग गए थे पिछले कुछ महीनों में, क्योंकि अमेरिका के बॉन्ड की जो यील्ड पहले 2-3% होती थी वो हो गई थी 5% के आस-पास. भारत के शेयर बाजार पर भी इसका असर पड़ रहा था. विदेशी निवेशक यहां से पैसा निकाल कर अमेरिका के बॉन्ड में लगाने लग गए थे. इसलिए कहा जा रहा था कि धनतेरस पर इस बार ज्यादा सोना लेने का मतलब नहीं बनता क्योंकि अनुमान ये था कि अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड अभी कुछ महीनों तक तो नहीं गिरने वाली. वहां पर महंगाई बनी ही हुई है और ट्रंप ईरान जंग जारी रखेंगे तो कच्चे तेल के दाम भी नहीं गिरते दिख रहे थे.
ट्रंप की हार ने बदल दिया माहौल
अचानक अमेरिका के चुनावों में ट्रंप हार गए तो सबके अनुमान ही बदल गए. अब अमेरिका की संसद में बहुमत हो गया ट्रंप की विपक्षी पार्टी का. अब आकलन ये है कि ट्रंप टैक्स में बड़ी कटौती के कोई प्रस्ताव तो पास करवा नहीं पाएंगे. कोई बड़ा ख़र्चा करने के लिए उनको संसद की मंजूरी मिलना मुश्किल हो सकता है. ईरान जंग के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो सकता है उनके लिए तो दबाव रहेगा कि जंग को जल्द खत्म किया जाए. तेल के दाम भी कंट्रोल में आ सकते हैं इससे और वो तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कम होने शुरू भी हो गए. यानी ट्रंप की खर्च बढ़ाने वाली नीतियों पर भी रोक लग सकती है और कर्ज बढ़ाने वाली नीतियों पर भी रोक लग सकती है. यानी अब अनुमान ये है कि अमेरिका की सरकार उतना कर्ज नहीं लेगी बाजार से जितना पहले अनुमान था.
तो क्या बढ़ने वाले हैं सोने के भाव
अगर अमेरिकी सरकार उधार कम लेगी मतलब अब सरकार को कम बॉन्ड जारी करने पड़ेंगे. जब बॉन्ड की सप्लाई कम होती है या भविष्य में कम होने की उम्मीद भी बनती है तो उनकी यील्ड गिरने लगती है और वही होना भी शुरू हो चुका है. साथ ही ईरान युद्ध को लेकर तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतें भी नीचे आई हैं, जिससे महंगाई का दबाव कुछ कम हो सकता है. इन्हीं वजहों से दस साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड जो 5% के पार चली गई थी वो अब 5% से नीचे आ चुकी है और अब तो लगभग 4.85% पर आ आ गई है. ये पिछले दो महीने का सबसे निचला स्तर है. तो अब बड़े वाले निवेशक, वो बड़े-बड़े बैंक क्या करेंगे? वो फिर सोना खरीदेंगे. यानी अब सोने के दाम गिरने का सीन तो दिख नहीं रहा जो कुछ दिन पहले तक था. सोना फिर बढ़ चला है. हालांकि, ये अभी यहां और कितना बढ़ेगा और कब तक बढ़ेगा इसमें बहुत सारे फैक्टर काम करेंगे. लेकिन जो सोने के दाम गिरने का सिलसिला था, वैसा तो अब नहीं लग रहा.
शेयर बाजार भी चढ़ने लगे
शेयर बाजार भी आप देख ही रहे हो कि फिर से चढ़ने लग गया है भारत में. उसकी वजह भी वही बतायी जा रही है कि अमेरिका की सरकार के बॉन्ड पर अब रिटर्न कम होता जा रहा है तो जो विदेशी निवेशक यहां से शेयर बेच-बेचकर अमेरिका की सरकार के बॉन्ड खरीद रहे थे उनके अब फिर से बॉन्ड के बजाय शेयर बाजार में पैसा लगाने आने की उम्मीद है. तो क्या धनतेरस पर सोना खरीद लेना चाहिए? ये और कितना बढ़ेगा? तो वो सब तो अभी आने वाले दिनों में जंग क्या रुख लेती है उससे साफ होता जाएगा, लेकिन इतना तो एक्सपर्ट अब मान ही रहे हैं कि ऊंचा कितना जाएगा वो तो देखना होगा लेकिन सोना आने वाले कुछ महीनों में गिरता तो नहीं दिख रहा. अमेरिका की जनता ने ट्रंप को ऐसा झटका दिया है कि एकदम से वक्त बदल गए, हालात बदल गए, जज्बात बदल गए. हैप्पी धनतेरस. सौ बात की एक बात.