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गर्मी बढ़ते ही फटने लगा लीची का फल, तो यहां जानिए कारण और...


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गर्मी बढ़ते ही फटने लगा लीची का फल, तो यहां जानिए कारण और बचाव के उपाय

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गर्मी बढ़ने के साथ कई जगहों पर लीची के फलों में दरार आने और फटने की समस्या बढ़ने लगी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तेज धूप, तापमान में अचानक बढ़ोतरी और पानी की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है. सही सिंचाई, नमी बनाए रखने और पौधों की देखभाल के जरिए किसान लीची के फलों को नुकसान से बचा सकते हैं.

जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि जब लंबे समय तक बाग में पर्याप्त मात्रा में नमी नहीं रहती और अचानक किसान बागों में अधिक पानी भर देते हैं, तो लीची का फल तेजी से पानी को सोखता है जिस कारण लीची के फल का अंदरूनी हिस्सा बढ़ जाता है और बाहरी छिलका फट जाता है. जिससे बाजारों में उसे फल की डिमांड कम रहती है और अच्छा भाव भी नहीं मिल पाता है.कैल्शियम, बोरॉन और पोटाश की कमी से फल की बाहरी परत मजबूत नहीं बन पाती. इससे क्रैकिंग की समस्या बढ़ जाती है.

लीची स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि इसमें विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. गर्मियों में लीची शरीर को ताजगी देने का काम करती है. यही कारण है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. बाजारों में इस समय लीची ₹100 से लेकर ₹120 प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है.

किसान जरूरत के हिसाब से नियमित बागों में पानी नहीं दे पाते इससे मिट्टी में नमी का संतुलन बिगड़ जाता है और लीची का फल प्रभावित होने लगते हैं. गर्मियों के मौसम में किसानों को बागों में नियमित हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे.और ड्रिप सिंचाई तकनीक इस समस्या में काफी फायदेमंद मानी जाती है .पेड़ों के आसपास सूखी घास, भूसा या प्लास्टिक मल्च बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इससे तापमान भी नियंत्रित रहता है.

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लीची के जिस पेड़ में सबसे अधिक फल फटने की समस्या आपको दिखाइए दे रही है उसे पेड़ पर 0.2 प्रतिशत बोरेक्स का छिड़काव करने से फल फटने की समस्या कम हो सकती है. इसके अलावा कैल्शियम और पोटाश का संतुलित उपयोग भी लाभकारी माना जाता है. 15 दिन में दो बार बोरेक्स का छिड़काव करने से धीरे-धीरे लीची के फल के फटने की समस्या से आपको राहत मिल जाएगी और बाजारों में अच्छा खासा भाव भी मिल जाएगा.

वही इस समय मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. भीषण गर्मी, तेज धूप और अनियमित सिंचाई के कारण लीची के फल फटने लगे हैं. फल फटने से न केवल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. कई बागों में बड़ी संख्या में लीची के फल खराब होने लगे हैं. जिससे किसान बेहद परेशान हैं। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है.

उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला वैसे तो गन्ना और धान की खेती के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन अब यहां की लीची भी अपनी खास मिठास और स्वाद के कारण लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। जिले के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर किसान लीची की बागवानी कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब पेड़ों पर लाल-लाल लीची के गुच्छे लटकते हैं तो बागों की खूबसूरती देखने लायक होती है.जिले की लीची खरीदने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दूर से व्यापारी पहुंचते हैं.

मौसम में अचानक आए परिवर्तन की वजह से फल के छिलके एवं गुद्दे के मध्य उच्च आंतरिक दबाव के कारण फल फट जाता है. सही समय पर फलों की तुड़ाई भी नहीं करने की वजह से भी फल के फटने की समस्या आ सकती है. फल को फटने से रोकने के लिए उपाय करना बेहद जरूरी होता है.फलों को फटने से बचाने के लिए उचित सिंचाई और जल प्रबंधन करें और फलों को फटने से बचाने के लिए सबसे आसान और प्रभावी तरीका यह है कि किसान अपने लीची के पेड़ों पर नियमित रूप से बौछार सिंचाई करें. इससे पेड़ में नमी बनी रहती है और लीची का छिलका मुलायम रहता है, जिससे फल फटने की समस्या कम हो जाती है.

इस समय जिले में तापमान लगातार बढ़ रहा है दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लीची के फलों पर असर पड़ने लगा है कई बागों में लीची का छिलका फट रहा है फल फटने के बाद उसका रंग और गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिससे बाजार में कीमत कम मिलती है. जिसको लेकर जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मई और जून का महीना लीची के फल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़सकती है.



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