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गर्मी में आप भी पशुओं को खिला रहे हैं हरी चरी, तो...


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गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है.

रायबरेली: गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा बेहद लाभदायक माना जाता है. किसान अक्सर दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को पर्याप्त पोषण देने के लिए चरी खिलाते हैं. लेकिन पशु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चरी को सही तरीके से और संतुलित मात्रा में नहीं खिलाया गया तो यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है. दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा (MVSC मथुरा) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि भीषण गर्मी के बीच पशुपालक अपने दुधारू पशुओं को हरा चारा देने पर जोर देते हैं.

खासकर ज्वार, बाजरा और मक्का की चरी पशुओं को खूब खिलाई जाती है. हालांकि, उनका कहना है कि कम उम्र की चरी या अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाने से पशुओं में अपच, पेट फूलने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में चरी खिलाने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद आवश्यक है.

बरतें ये सावधानी

इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि गर्मी के मौसम में हरे चारे के रूप में चरी पशुओं के लिए पोषण का अच्छा स्रोत है. इसमें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा, विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. लेकिन चरी को काटने और खिलाने के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.वह बताते हैं कि ज्वार की कम उम्र वाली चरी में हाइड्रोसायनिक एसिड (HCN) की मात्रा अधिक हो सकती है, जो पशुओं के लिए विषैली साबित हो सकती है. इसलिए ज्वार की चरी को कम से कम 50 से 60 दिन की उम्र होने के बाद ही पशुओं को खिलाना चाहिए. इसके अलावा हरे चारे को कभी भी खाली पेट अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए.पहले पशुओं को सूखा चारा या भूसा खिलाएं, उसके बाद हरा चारा दें.इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और पेट फूलने की समस्या से बचाव होता है.

हरे चारे के साथ संतुलित आहार देना भी जरूरी 

केवल चरी पर निर्भर रहने से पोषण असंतुलन हो सकता है.पशुओं को स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. आगे की जानकारी देते हुए वह बताते हैं कि चरी पर ओस या बारिश का पानी होने की स्थिति में उसे तुरंत न खिलाएं. चारा थोड़ा सूखने के बाद ही पशुओं को दें.किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

संतुलित मात्रा में दे

गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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