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गर्मी में बढ़ जाती है पित्ती की समस्या, जानिए खुजली और जलन...


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गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना आने और तेज धूप के संपर्क में रहने से कोलीनर्जिक अर्टिकेरिया (हीट हाइव्स) या सोलर अर्टिकेरिया ट्रिगर हो जाते हैं. इस दौरान त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स सक्रिय होकर हिस्टामाइन नामक रसायन छोड़ते हैं, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होने लगती है.डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, “गर्मी में त्वचा को ठंडा और साफ रखना बेहद जरूरी है

गर्मी और उमस भरे मौसम में त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ जाती हैं, जिनमें से एक आम समस्या है. पीती (हाइव्स/अर्टिकेरिया). इस स्थिति में त्वचा पर लाल-लाल उभरे हुए चकत्ते दिखाई देते हैं, जिनमें तेज खुजली और जलन होती है. कई बार ये चकत्ते शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाते हैं. व्यक्ति को काफी असहज कर देते हैं. खासतौर पर बच्चों में यह समस्या गर्मियों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिससे उनकी नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं.

क्यों बढ़ती है गर्मी में पित्ती की समस्या*
गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना आने और तेज धूप के संपर्क में रहने से कोलीनर्जिक अर्टिकेरिया (हीट हाइव्स) या सोलर अर्टिकेरिया ट्रिगर हो जाते हैं. इस दौरान त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स सक्रिय होकर हिस्टामाइन नामक रसायन छोड़ते हैं, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होने लगती है.डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, “गर्मी में त्वचा को ठंडा और साफ रखना बेहद जरूरी है, तभी इस समस्या से राहत मिल सकती है.

खुजली और जलन से राहत के 3 असरदार तरीके

1. ठंडी सिकाई और कैलामाइन लोशन का इस्तेमाल
खुजली और जलन से तुरंत राहत पाने के लिए प्रभावित हिस्से पर ठंडी सिकाई करना बेहद फायदेमंद होता है. बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने की बजाय उसे कपड़े में लपेटकर 10-15 मिनट तक सिकाई करें. इसके साथ ही कैलामाइन लोशन या मेन्थॉल युक्त कूलिंग जेल लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और खुजली कम होती है.

2. सूती कपड़े पहनें और शरीर को ठंडा रखें
पसीना पित्ती को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण होता है. इसलिए ढीले-ढाले, हल्के और हवादार सूती कपड़े पहनना चाहिए, ताकि त्वचा पर पसीना जमा न हो. घर या कार्यस्थल को ठंडा रखें, जैसे कूलर या एसी का इस्तेमाल करें, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे.

3. आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय अपनाएं
डॉक्टर अनिल बताते हैं कि आयुर्वेद में इस समस्या का इलाज शरीर की गर्मी को संतुलित करके किया जाता है. घरेलू उपायों के रूप में गोंद कतीरा, नींबू पानी, शिकंजी, खीरा, तरबूज, खरबूजा और नारियल पानी का सेवन फायदेमंद होता है. इससे शरीर हाइड्रेटेड और ठंडा रहता है.इसके अलावा खाने में पुराने चावल का उपयोग करना, आटे में जौ मिलाना और शरीर पर चंदन का लेप लगाना भी राहत देता है। मटके का पानी और धनिए के बीजों का पानी पीने से भी शरीर की गर्मी कम होती है और पित्ती में आराम मिलता है.

रखें खास ध्यान
अगर पित्ती की समस्या बार-बार हो रही है या ज्यादा गंभीर हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह जरूर लें. सही समय पर उपचार और सावधानी अपनाकर इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.



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