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गाय के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक दूध उत्पादन के लिए अजोला हरा चारा एक बेहतरीन विकल्प है. अजोला प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होता है. इसे कम जगह और कम लागत में घर पर ही टब या छोटे हौज में आसानी से उगाया जा सकता है. इसे मुख्य आहार के साथ पूरक चारे के रूप में देने से पशुओं का दूध बढ़ता है.
पलामूः दुधारू पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक दूध उत्पादन के लिए हरा चारा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जिस तरह इंसान के जीवन के लिए पानी जरूरी है, उसी तरह दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे की अहम भूमिका होती है. नेपियर, बरसीम समेत कई हरे चारे पशुपालक अपने खेतों में उगा सकते हैं. जहां खास बात यह है कि नेपियर घास को एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक काटकर पशुओं को खिलाया जा सकता है. वहीं, कम जगह वाले पशुपालकों के लिए अजोला एक बेहतर विकल्प बन सकता है.
दरअसल, अजोला को पशुओं के लिए संजीवनी से कम नहीं माना जाता. इसे उगाने के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती. घर के आंगन, छोटे स्थान या छत पर भी इसे तैयार किया जा सकता है. इसके लिए करीब 10×10 फीट जगह में ईंटों की मदद से छोटा हौज बनाया जा सकता है या फिर बड़े टब का इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या कहते हैं पशु चिकित्सक
पशु चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि अजोला तैयार करने के लिए टब या हौज में पानी भरकर उसमें थोड़ी मिट्टी और गोबर मिलाया जाता है. इसके बाद करीब 100 से 500 ग्राम अजोला डालकर 10 से 15 दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है. अनुकूल परिस्थितियों में अजोला तेजी से फैलने लगता है और कुछ ही समय में पशुओं के लिए हरा चारा तैयार हो जाता है. इसे नियमित रूप से निकालकर पशुओं के आहार में शामिल किया जा सकता है.
आगे कहा कि अजोला में प्रोटीन, खनिज, विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए यह पशुओं के संतुलित आहार का एक उपयोगी हिस्सा हो सकता है. पशुपालक इसे हरे चारे के साथ मिलाकर पशुओं को दे सकते हैं. इससे पशुओं के पोषण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.
पूरक चारे के रूप में करें इस्तेमाल
हालांकि अजोला को पशुओं के मुख्य आहार का अकेला विकल्प नहीं बनाना चाहिए. इसे साफ पानी से अच्छी तरह धोकर और संतुलित पशु आहार के साथ उचित मात्रा में देना बेहतर है. पशुओं के दूध और स्वास्थ्य में बदलाव हर पशु में अलग-अलग हो सकता है. इसलिए नियमित आहार के साथ अजोला को पूरक चारे के रूप में इस्तेमाल करना पशुपालकों के लिए ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी तरीका है. इसे कम लागत, कम जगह और आसानी से उत्पादन की वजह से अजोला छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए खासा उपयोगी साबित हो सकता है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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