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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार की रात जामताड़ा में एनकाउंटर में मारा गया। यह उसके गैंग के साथ-साथ वासेपुर के भगोड़े प्रिंस खान के गिरोह के लिए भी बड़ा झटका है। दोनों गिरोहों का सिंडिकेट पिछले काफी समय से पूरे झारखंडमें आतंक फैला रहा है। रांची पुलिस द्वारा सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान गैंग से जुड़े अपराधियों/शूटरों को गिरफ्तार किए जाने के बाद यह बात सामने आई थी। इसमें प्रिंस धनबाद और रांची के व्यवसायियों, जमीन कारोबारियों व ठेकेदारों को धमकाकर रंगदारी वसूलता था। सुजीत सिन्हा की मदद के बदले उसके परिवार को नियमित रूप से वित्तीय सहायता पहुंचाता था। पूछताछ में गुर्गों ने स्वीकार किया था कि रंगदारी के पैसे का एक बड़ा हिस्सा प्रिंस खान द्वारा सुजीत की मां के खाते में या स्थानीय हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाता था। वहीं, सुजीत के रेकी और फायरिंग करने वाले गुर्गे, जो घटना को अंजाम देते थे। उन्हें भी खर्च देता था। सुजीत सिन्हा का केस (वकील की फीस) लड़ने, जेल के भीतर सुविधाएं जुटाने और उसके परिवार के खर्च को चलाने के लिए प्रिंस खान सुजीत की मां तक यह रकम भिजवाता था। सुजीत गैंग के शूटर प्रिंस खान के लिए काम करते रहें इसकेलिए प्रिंस खान सुजीत के परिवार की आर्थिक देखभाल सुनिश्चित करता था। दूसरे जिलों में गैंग खड़ा करने के लिए सुजीत सिंह से हाथ मिलाया था
प्रिंस दुबई और फिर पाकिस्तान से डिजिटल माध्यमों से खौफ पैदा कर रहा है, तो सुजीत जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क से जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहा था। प्रिंस ने धनबाद में नेटवर्क कमजोर होने पर दूसरे जिलों में गैंग खड़ा करने के लिए सुजीत सिंह से हाथ मिला लिया था। उसके साथ मिलकर रांची, पलामू, हजारीबाग, जमशेदपुर और हजारीबाग में कारोबारियों को रंगदारी के लिए धमका रहा था और फायरिंग भी करा रहा था। झारखंड पुलिसऔर एटीएस की जांच में दोनों गिरोहों के बीच गहरी साठ-गांठ औरएक-दूसरे के संसाधनों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ था। कई बार वारदातों की जिम्मेदारी लेने के लिए दोनों गैंग अलग-अलग नामों का सहारा लेते थे। हवाला से मनी ट्रांसफर, हथियार खरीदने में भी इस्तेमाल
झारखंड में सुजीत सिन्हा गैंग के गुर्गों और स्थानीय हवाला ऑपरेटरों के जरिए रंगदारी की रकम प्रिंस खान तक पहुंचाई जाती थी। प्रिंस उस पैसे का एक हिस्सा विदेश में अपने सुरक्षित ठिकाने के लिए रखता था और बाकी रुपए हथियार खरीदने, सुजीत गैंग के गुर्गों को पेमेंट करने के लिए दे देता था। प्रिंस रंगदारी का पैसा सुजीत के रिश्तेदारों को भी भेजता था। रांची, लातेहार, रामगढ़, पलामू , हजारीबाग में दोनों पर एक साथ केस
राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते और जिला पुलिसकी जांच के अनुसार, सुजीत और प्रिंस के खिलाफ एक साथ कई मुकदमे दर्ज हैं। रांची के होटल में फायरिंग मामले में दोनों के नाम एक साथ आए थे। दोनों गैंग के गुर्गें भी पकड़े गए थे। लातेहार के ट्रांसपोर्टरों और क्रशर मालिकों के ठिकानों पर सुजीत-प्रिंस के नाम वाले साझा पर्चे फेंककर रंगदारी मांगने और रुपए नहीं देने पर गाड़ियों में आग लगाने का केस दर्ज हुआ था। रामगढ़ और हजारीबाग में भी दोनों के गुर्गों रंगदारी के लिए वाहनों में आग लगा दी थी। पलामू में भी दोनों के खिलाफ केस दर्ज हैं। कोयलांचल शांति सेना और साझा नाम से धमकी
प्रिंस खान का मुख्य प्रभाव क्षेत्र धनबाद था, जबकि सुजीत गैंग रांची, पलामूऔर लातेहार में मजबूत था। प्रिंस ने सुजीत के गुर्गों की मदद से कोयलांचल शांति सेना या साझा नाम से रांची और आसपास के बड़े व्यवसायियों, ठेकेदारों तथा बिल्डरों को धमकाकर रंगदारी मांगना शुरू किया था। सुजीत के गुर्गे सामने से व्यवसायियों को डराते थे और प्रिंस विदेश से इंटरनेटकॉलिंग/वर्चुअल नंबरों से धमकी भरे फोन कॉल या ऑडियो/वीडियो मैसेज भेजकर दबाव बनाता था।
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