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घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं, तो डेढ़ गुना ज्यादा होल्डिंग...




गर्मी के दिनों में अक्सर भारी जल संकट का सामना करने वाले चास नगर निगम क्षेत्र में अब जल संरक्षण के नाम पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, निगम की टैक्स वसूली व्यवस्था ने इन दिनों शहर के हजारों मकान मालिकों और फ्लैट खरीदारों को गहरी परेशानी में डाल दिया है। बिना किसी पूर्व जांच और बिना कोई नोटिस दिए, होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) जमा करने वाले लोगों से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन प्रणाली) नहीं होने के नाम पर भारी-भरकम जुर्माना वसूल रहा है। चास नगर निगम के इस फैसले से लोग निगम के इस रवैये से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बताते चलें कि निगम में लगभग 40 हजार लोग होल्डिंग टैक्स देते हैं। विदित हो कि वर्ष 2017 में जब बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन किया गया था, तब नए और पुराने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का कड़ा प्रावधान किया गया था। शुरुआत में निगम की ओर से कुछ दिनों तक गड्ढे (पिट) बनाने के लिए जागरुकता अभियान चलाया गया, लेकिन फिर यह ठंडे बस्ते में चला गया। कई ऐसे नागरिक हैं, जो नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स जमा करते आ रहे हैं, लेकिन अब अचानक उन्हें वर्ष 2017 से जोड़कर होल्डिंग टैक्स का डेढ़ गुना तक जुर्माना के साथ रसीद थमाया जा रहा है। हजारों रुपए का भेजा जा रहा डिमांड नोट: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जो टैक्स पहले 2500 से 3000 रुपए के आसपास आता था, उसमें पिछले कई सालों का बकाया और डेढ़ गुना जुर्माना एकमुश्त जोड़कर अब 20 से 30,000 रुपए तक के डिमांड नोट भेजे जा रहे हैं। पूछने पर निगम के कर्मचारी यही बता रहे हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने के कारण यह पेनल्टी लगी है। 2025 में भूजल का दोहन 49.45 प्रतिशत तक पिछले 5 वर्षों में चास और समग्र बोकारो जिले में भूजल स्तर की स्थिति बेहद चिंताजनक रही है और इसमें लगातार तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। भारत सरकार की डायनेमिक अंडर ग्राउंड वाटर रिपोर्ट 2025 के अनुसार, जिले में भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है। वर्ष 2021 में यहां भूजल का दोहन मात्र 30 प्रतिशत था। इसके बाद 2023 में यह बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया और 2025 की रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा 49.45 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो भूजल के अंधाधुंध इस्तेमाल को दर्शाता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के​ लिए लागू किया गया जल संरक्षण प्रावधान नियमों के अनुसार, कुल डेवलप्ड एरिया के 10 फीसदी हिस्से पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाना अनिवार्य है। अगर किसी का घर 2000 वर्गफीट में है, तो 200 वर्गफीट में गड्‌ढा होना चाहिए। इसकी न्यूनतम लंबाई-चौड़ाई 7/5 फीट और गहराई 5 फीट होनी चाहिए। नियम यह भी कहता है कि यदि आपके भवन का सामान्य होल्डिंग टैक्स 1500 रुपए है और घर में जल संरक्षण प्रणाली नहीं है, तो जुर्माने के साथ आपको डेढ़ गुना तक यानि 1700 रुपए चुकानी होगी। इस नई कर-प्रणाली से विभिन्न सोसाइटी या अपार्टमेंट्स में फ्लैट लेकर रहने वाले लोग भी प्रभावित हैं। चास के अधिकांश बिल्डरों ने नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण तो कर लिया, लेकिन रेन वाटर हार्वेस्टिंग का गड्ढे नहीं बनाया। बिना इस अनिवार्य व्यवस्था के ही बिल्डरों ने धड़ल्ले से फ्लैट बेच दिए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि बिना हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए इन बिल्डरों को चास नगर निगम से कंप्लीशन सर्टिफिकेट या एनओसी कैसे दिया। उस समय नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की गलती का खामियाजा आज निर्दोष फ्लैट मालिक भुगत रहे हैं। बिल्डरों व निगम अधिकारियों की चूक का बोझ फ्लैट मालिकों पर नगर निगम जुर्माना के साथ थमा रहा है रसीद



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