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Indus Water Treaty News: सिंधु जल संधि पर सख्त रुख के बाद अब भारत सरकार ने रावी नदी के पानी के अधिकतम उपयोग की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ा दिया है. जम्मू-कश्मीर की लंबे समय से अटकी उझ (Ujh) परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से रावी नदी के भारत के हिस्से का अधिक पानी देश के भीतर सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जो पहले पाकिस्तान चला जाया करता था.
केंद्र सरकार ने अब जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से अटकी उझ (Ujh) प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ा दी है.
सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डालने के बाद केंद्र सरकार ने अब जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से अटकी उझ (Ujh) प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ा दी है. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है, जो वर्षों तक फाइलों में दबे रहे और जिनकी देरी का सीधा नुकसान देश को उठाना पड़ा.
उन्होंने कहा कि उझ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट और शाहपुरकंडी परियोजना सिर्फ विकास योजनाएं नहीं हैं, बल्कि भारत के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और रणनीतिक हितों से भी जुड़ी हुई हैं. इन परियोजनाओं में लंबे समय तक देरी होने के कारण रावी नदी और उसकी सहायक नदियों का काफी पानी बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान की ओर बहता रहा.
करीब एक सदी पुराना सपना, अब मिलेगा नया जीवन
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उझ परियोजना की परिकल्पना लगभग 100 वर्ष पहले की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह दशकों तक आगे नहीं बढ़ सकी. इसी तरह शाहपुरकंडी परियोजना भी करीब 40 वर्षों तक अधर में लटकी रही. उन्होंने कहा कि अब मोदी सरकार इन दोनों परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जल शक्ति मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी कंपनी WAPCOS लिमिटेड के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की और परियोजना के चरणबद्ध क्रियान्वयन की समीक्षा की.
भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ शुरू होगा निर्माण कार्य
इस बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा. पूरी जमीन के अधिग्रहण का इंतजार करने के बजाय जहां भूमि उपलब्ध होगी, वहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. इसके साथ ही बाकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी रहेगी. सरकार का मानना है कि इस रणनीति से परियोजना के पूरा होने में लगने वाला समय कम होगा और लोगों को इसके लाभ जल्द मिल सकेंगे.
‘गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं’
डॉ. जितेंद्र सिंह ने परियोजना से जुड़ी एजेंसियों को निर्देश दिए कि काम में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए नई तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणालियों का इस्तेमाल करने को भी कहा.
रावी के पानी का अधिकतम उपयोग करना लक्ष्य
केंद्र सरकार का कहना है कि उझ और शाहपुरकंडी जैसी परियोजनाओं का उद्देश्य भारत के हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है. इन परियोजनाओं के पूरा होने से सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2019 में शाहपुरकंडी परियोजना को फिर से शुरू किया गया था और अब यह लगभग पूरी होने की स्थिति में है. वहीं 2026 में उझ परियोजना को दोबारा गति देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि वर्षों से लंबित राष्ट्रीय परियोजनाओं को अब तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य केवल अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि देश के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर लोगों तक उसका सीधा लाभ पहुंचाना भी है.
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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