चंदौली: जिले के अलीनगर, चकिया, इलिया और शाहबगंज थाना क्षेत्रों में पशु चोरी की घटनाओं ने किसानों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों के मुताबिक चोर रात के अंधेरे में घर और दरवाजे के बाहर बंधी भैंसों को खोलकर ले जा रहे हैं. कई मामलों में चोरों ने बड़ी और महंगी भैंसों को ही निशाना बनाया. पीड़ितों का कहना है कि चोरी गई भैंसों की कीमत 2 से 3 लाख रुपये तक थी. पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई का बड़ा जरिया है, ऐसे में 2 भैंसों की चोरी उनके लिए सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक नुकसान है.
25 से 30 भैंसें चोरी होने का दावा
ग्रामीण राजेश द्विवेदी ने लोकल 18 को बताया कि उनके क्षेत्र में 4 अप्रैल से लेकर 30 जुलाई के बीच लगातार पशु चोरी की घटनाएं हुई हैं. उनका दावा है कि इस दौरान करीब 25 से 30 भैंसें चोरी हो चुकी हैं. हम ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी दिया है. ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब पुलिस ने चोरों को पकड़ा, तो चोरी गई भैंसों की बरामदगी क्यों नहीं हुई. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि पकड़े गए आरोपियों से उनकी भैंसों के बारे में क्या पूछताछ हुई और बरामदगी के लिए क्या कदम उठाए गए. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है.
चोर पकड़े गए तो हमारी भैंसें कहां हैं?
राजेश द्विवेदी ने कहा कि ग्रामीणों को चोर पकड़े जाने की जानकारी पुलिस से सीधे नहीं मिली, बल्कि उन्हें अखबार और मोबाइल पर आई खबरों के जरिए पता चला. ग्रामीणों का सवाल है कि अगर आरोपी वास्तव में भैंस चोरी में शामिल हैं, तो उनसे पूछताछ कर चोरी गई भैंसों को बरामद क्यों नहीं किया गया? किसानों का कहना है कि केवल आरोपियों को गिरफ्तार कर लेने से उनकी समस्या खत्म नहीं होगी. जब तक भैंसें वापस नहीं मिलतीं या नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक उनके लिए यह कार्रवाई अधूरी है.
रात में 1 से 2 बजे के बीच चोरी हुई 2 भैंसें
पीड़ित गुड्डू ने लोकल 18 को बताया कि उनका घर इलिया थाना क्षेत्र में है. 12 मई की रात उनकी 2 भैंसें चोरी हो गईं. उन्होंने बताया कि चोरी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच हुई. गुड्डू ने बताया कि चोरी हुई भैंसों में एक करीब 8 महीने की गाभिन थी, जबकि दूसरी 2 दांत की पड़िया थी. दोनों की कुल कीमत करीब ढाई लाख रुपये बताई गई. गुड्डू ने बताया कि वह अपने मकान के पीछे सो रहे थे. सुबह उठने पर भैंसें गायब मिलीं. इसके बाद उन्होंने इलिया थाने में शिकायत की. उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से पहले 2-4 दिन में भैंस खोजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली. गुड्डू ने कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं और कई बार थाने जाकर अपनी भैंसों को खोजने की गुहार लगा चुके हैं.
किसी की 2, किसी की 3 लाख रुपये की भैंस
ग्रामीण शिव चौबे ने भी लोकल 18 से बताया कि उनकी 2 भैंसें चोरी हुई हैं. उन्होंने इलिया थाने में लिखित शिकायत दी थी. उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद पुलिस ने जानकारी जुटाने और कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन अब तक उन्हें भैंसों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली. वहीं, ग्रामीण राम दुलार ने लोकल 18 से बताया कि उनकी भी 2 भैंसें चोरी हुई हैं. उन्होंने शाहबगंज थाने में लिखित शिकायत दी थी. राम दुलार ने बताया कि थाने की ओर से चोरों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने का आश्वासन दिया गया था.
बड़ी भैंसों को चुनकर ले गए चोर
युवा सत्येंद्र कुमार ने लोकल 18 से बताया कि उनकी 2 भैंसें रात करीब 2 से 3 बजे के बीच चोरी हुईं. खास बात यह रही कि दरवाजे पर कई भैंसें बंधी थीं, लेकिन चोर उनमें से 2 बड़ी भैंसों को ही खोलकर ले गए. सुबह उठने पर जब परिवार को भैंसों के गायब होने की जानकारी हुई, तो उन्होंने डायल 100 को सूचना दी और थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई. सत्येंद्र ने बताया कि उनकी दोनों भैंसों की कीमत करीब 3 लाख रुपये थी. उन्होंने बताया कि मामले में एफआईआर संख्या 122/25 दर्ज है.
चोर गिरफ्तार, लेकिन भैंसों की बरामदगी अब भी सवाल
लगातार हो रही पशु चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों ने कहा कि अप्रैल से शुरू हुआ यह सिलसिला जुलाई तक चलता रहा और अब अगस्त में भी उन्हें अपनी चोरी गई भैंसों की बरामदगी का इंतजार है. किसानों ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है, तो अब सबसे बड़ा सवाल चोरी गई भैंसों की बरामदगी का है. आखिर लाखों रुपये कीमत की ये भैंसें कहां गईं? क्या इन्हें किसी दूसरे जिले में बेच दिया गया या पशु तस्करी से जुड़े किसी नेटवर्क तक मामला पहुंचता है? फिलहाल, ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत और नाराजगी दर्ज करा चुके हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी भैंसों की बरामदगी चाहिए. वहीं, पूरे मामले में पुलिस की जांच और बरामदगी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस कथित पशु चोरी के पीछे कौन लोग हैं और चोरी गई भैंसों का आखिर क्या हुआ.