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चीन के 1500 स्टील्थ फाइटर्स को पूरी तरह मटियामेट करेगा भारत का...


नई दिल्‍ली. भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रविवार सुबह चंडीगढ़ के पास पंचकूला (हरियाणा) के रामगढ़ में स्थित अपनी बेहद संवेदनशील विंग ‘टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी’ (TBRL) में एक बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी ‘हाई-कैलिबर बम’ का सफल परीक्षण किया है. वायुसेना के आला अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में किए गए इस महापरीक्षण की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई. यह बम इतना घातक था कि परीक्षण से पहले ही प्रशासन ने आस-पास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी थी. अधिकारियों के मुताबिक, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया गया यह ट्रायल पूरी तरह सटीक और सफल रहा, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को अचूक और तबाही मचाने वाली मारक क्षमता प्रदान करेगा.

यह धमाका DRDO की आर्मामेंट्स क्लस्टर के तहत आने वाली प्रतिष्ठित प्रयोगशाला TBRL में हुआ, जहां भारत के नए ‘हाई-कैलिबर’ बम की क्षमताओं को परखा गया. हालांकि TBRL में पहले भी कई विस्फोटक परीक्षण होते रहे हैं, लेकिन इस बार का धमाका बेहद खास और विशाल था, क्योंकि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक रिकॉर्ड की गई.

एयरफोर्स के अफसरों की मौजूदगी के मायने
इस परीक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह हाई-कैलिबर बम सीधे तौर पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों से गिराए जाने वाले युद्धक हथियारों या फिर IAF की अत्याधुनिक मिसाइलों के वॉरहेड का हिस्सा बनने जा रहा है. यह परीक्षण चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर जारी तनाव के बीच भारत की हवाई संप्रभुता को और मजबूत करेगा.

1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक उड़े टुकड़े
बम की संहारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षण से पहले TBRL ने चेतावनी जारी की थी कि ब्लास्ट के बाद बम के मलबे और टुकड़े हवा में 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ सकते हैं और धमाके की जगह से 2 किलोमीटर के दायरे में फैल सकते हैं. इसी वजह से पंचकूला प्रशासन ने भानू और बिल्ला जैसे नजदीकी गांवों में ‘कफ्र्यू’ जैसी स्थिति बनाते हुए लोगों को सुबह के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी थी. सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को विशेष सर्विलांस (निगरानी) पर रखा गया था.

क्या है TBRL और इसकी ताकत?
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) भारत के मिसाइल और परमाणु हथियारों के विकास कार्यक्रमों की रीढ़ मानी जाती है. यह लैब मुख्य रूप से उच्च विस्फोटकों, डेटोनेटर, शॉक वेव्स और हथियारों के अंतिम विनाशकारी प्रभाव का आकलन करने के लिए डेटा तैयार करती है. सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) के महात्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए विशेष पैराशूट और उपकरणों का मूल्यांकन भी इसी लैब में किया जा रहा है. इसके अलावा, यह लैब अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए नॉन-लेथल बुलेट्स (गैर-घातक गोलियां), लिक्विड आर्मर और हैंड ग्रेनेड भी विकसित करती है.

परीक्षण के रणनीतिक प्रभाव

1. स्वदेशी मारक क्षमता में आत्मनिर्भरता: वायुसेना की मौजूदगी यह साबित करती है कि भारत अब विदेशी वेंडर पर निर्भर रहने के बजाय अपने लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल, सुखोई और तेजस) के लिए भारी वजन वाले ‘हाई-कैलिबर’ बम खुद बना रहा है. यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाएगा.

2. वॉरहेड टेक्नोलॉजी में महारत: TBRL का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से पुराना नाता है. इस सफल टेस्ट से यह स्पष्ट है कि भारत ने उन्नत विस्फोटक और शॉक वेव तकनीक पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे आने वाले समय में हमारी मिसाइलों की मारक क्षमता और अधिक विनाशकारी हो जाएगी.

3. दोहरे उपयोग वाली तकनीक: यह लैब केवल भारी बम ही नहीं बनाती, बल्कि पुलिस और पैरामिलिट्री के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट (लिक्विड आर्मर) और नॉन-लेथल बुलेट्स भी तैयार करती है. यानी रक्षा क्षेत्र का यह अनुसंधान देश की बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक कानून व्यवस्था को भी आधुनिक बना रहा है.

सवाल-जवाब
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) का मुख्य काम क्या है?
TBRL का मुख्य काम मिसाइलों के वॉरहेड और प्रोजेक्टाइल्स का मूल्यांकन करना, उच्च विस्फोटकों की टेस्टिंग करना और हथियारों से होने वाले अंतिम नुकसान (Terminal Effects) का डेटा तैयार करना है.
इस बम परीक्षण के दौरान हवाई सुरक्षा के क्या मायने हैं?
वायुसेना के अफसरों की मौजूदगी दर्शाती है कि यह बम भविष्य में फाइटर जेट्स से गिराए जाने वाले पारंपरिक बमों या फिर लॉन्ग-रेंज मिसाइलों के भीतर फिट होने वाले विस्फोटक का हिस्सा बनेगा.
धमाके की जगह से कितनी दूरी को संवेदनशील घोषित किया गया था?
सुरक्षा के दृष्टिकोण से परीक्षण स्थल के चारों ओर 2 किलोमीटर के पूरे रेडियस (दायरे) को अत्यंत संवेदनशील ज़ोन घोषित किया गया था.
सैन्य हथियारों के अलावा TBRL नागरिक या अर्धसैनिक बलों के लिए क्या बनाती है?
TBRL ने अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए एडवांस्ड हैंड ग्रेनेड, लिक्विड आर्मर (बुलेटप्रूफ तकनीक), बाधाओं को उड़ाने वाले डिवाइस और भीड़ नियंत्रण के लिए गैर-घातक गोलियां विकसित की हैं.



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