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Indo-China Relationship : भारत और चीन के रिश्ते एक बार फिर व्यापारिक रास्ते पर लौट आए हैं. लेकिन, भारतीय उद्योग परिसंघ ने चेतावनी दी है कि चीन के साथ कारोबार और करार करने से पहले काफी सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने चीन के साथ एफटीए पर आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की जांच करने की बात कही है.
भारत और चीन के रिश्तों पर व्यापारिक दिग्गजों ने सावधान रहने की चेतावनी दी है.
नई दिल्ली. भारत और चीन के हालिया व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि किस तरह दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है. भारत-चीन रिश्तों की यह गर्माहट आयात-निर्यात, व्यापारिक सहयोग और निवेश में भी दिखनी शुरू हो गई है. आंकड़े उत्साहजनक तो हैं, लेकिन चिंताएं भी पैदा हो रही हैं. तभी तो भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज ने चीन के साथ कारोबारी रिश्तों पर आगे बढ़ते समय सावधानी और सतर्कता पर पूरा जोर देने की बात कही है.
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नवनियुक्त अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा है कि भारत में चीन के निवेश एवं प्रौद्योगिकी का स्वागत है, लेकिन उसके साथ व्यापार खोलने के मामले में देश को सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग को चीन पर आयात निर्भरता कम करने और देश में ही विनिर्माण बढ़ाने के उपाय खोजने चाहिए. इस विषय पर विभिन्न पक्षों की मिली-जुली राय रही है, लेकिन मैं यह कहूंगा कि चीन से निवेश और तकनीक का स्वागत है. बावजूद इसके खुले व्यापार के मामले में हमें बहुत सावधानी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
चीन के साथ एफटीए कितना फायदेमंद
भारत के चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर विचार करने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर आगे बढ़ने से पहले यह ध्यान देना जरूरी है कि इससे भारत को कितना फायदा होने वाला है. चीन वित्तवर्ष 2025-26 में अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया. इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा. हालांकि, चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, लेकिन आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा. इस तरह व्यापार घाटा 2024-25 के 99.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया.
आरसीईपी से बाहर हो गया भारत
भारत पहले 16 सदस्यीय क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समूह का हिस्सा था, लेकिन नवंबर, 2019 में इससे बाहर हो गया. आरसीईपी में 10 आसियान देश और चीन शामिल हैं. मुकुंदन ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां चीन के साथ सहयोग बढ़ा सकती हैं, उनमें बैटरी भंडारण, वाहन बैटरियों, सेमीकंडक्टर में उपयोग होने वाले विशेष रसायन तथा अन्य हाईटेक टेक्नोलॉजी क्षेत्र शामिल हैं. अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है और यह समझौता इसे और मजबूत करेगा.
अमेरिका-भारत की डील के क्या मायने
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत जारी है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए भारत आए हैं. उन्होंने कहा कि जब तक हमारी शुल्क दरें प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर हैं, तब तक हम ठीक रहेंगे. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें अन्य देशों के समान या थोड़ा बेहतर लाभ मिले और हम किसी भी तरह से नुकसान में न रहें. सीआईआई अध्यक्ष ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने के लिए सरकार को क्षेत्र-विशेष रणनीति अपनाने की सलाह दी है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें