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जब खत्म होने को आया सीजन, तब भी पलामू के इस बागान में लदे हैं आम! खूब कमाई

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Palamu Off Season Mango Sale: आम का सीजन लगभग खत्म हो गया है पर पलामू के चेड़बार गांव में किसान तारकेश्वर सिंह के बाग में अभी भी आमों की तुड़ाई और इससे अच्छी कमाई चल रही है. इन्होंने आम्रपाली और मल्लिका किस्म के आम लगाए थे जो देर से फलते हैं. केमिकल फ्री होने के कारण आसपास के जिलों से भी लोग इनके पास आम खरीदने आ रहे हैं.

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पलामू. बदलते मौसम में जहां अधिकांश जगहों पर आम का सीजन लगभग खत्म हो चुका है, वहीं पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के चेड़बार गांव में एक किसान का आम का बाग अब भी फलों से लदा हुआ है. यहां देर से पकने वाली आम्रपाली और मल्लिका किस्म के आमों की तुड़ाई लगातार जारी है. खास बात यह है कि पूरी तरह रसायनमुक्त इन आमों की बाजार में जबरदस्त मांग है और किसान इन्हें 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं. ऑफ-सीजन में ताजे और मीठे आम मिलने से दूर-दूर से लोग सीधे बाग में पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं.

रोजाना दो क्विंटल तक हो रही बिक्री
किसान तारकेश्वर सिंह ने लोकल 18 को बताया कि आम्रपाली और मल्लिका दोनों ही देर से पकने वाली किस्में हैं. इसलिए जब दूसरे बागों में आम खत्म हो जाते हैं, तब इनके बाग में तुड़ाई जारी रहती है. वर्तमान में हर दिन करीब दो क्विंटल आम की बिक्री हो रही है. अब तक करीब 60 क्विंटल आम बिक चुके हैं, जबकि अभी भी 20 से 25 क्विंटल आम पेड़ों पर मौजूद हैं, जिनकी तुड़ाई और बिक्री जारी है.

रसायनमुक्त होने से बढ़ी मांग
उन्होंने बताया कि बाग में तैयार होने वाले आम पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाए गए हैं. इनमें किसी प्रकार के हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है. यही वजह है कि इनका स्वाद बेहद मीठा है और ग्राहक इन्हें पसंद कर रहे हैं. किसान का कहना है कि शहरों में मिलने वाले आमों की तुलना में यहां कम कीमत पर शुद्ध और ताजे आम उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे खरीदार सीधे बाग तक पहुंच रहे हैं.

चार जिलों से पहुंच रहे खरीदार
चेड़बार गांव का यह बाग अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है. रांची, पलामू, गढ़वा और लातेहार से लोग यहां आम खरीदने पहुंच रहे हैं. कई ग्राहक हर वर्ष इसी बाग से आम खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें यहां गुणवत्ता और स्वाद दोनों मिलते हैं.

देर से पकने वाली किस्में किसानों के लिए फायदेमंद
उन्होंने यह भी कहा कि आम्रपाली और मल्लिका जैसी देर से पकने वाली किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प हैं. जब बाजार में सामान्य आम की आवक कम हो जाती है, तब इन किस्मों को बेहतर कीमत मिलती है. इससे किसानों की आय बढ़ती है और उन्हें लंबे समय तक आम की बिक्री का अवसर मिलता है. चेड़बार का यह बाग इसका जीवंत उदाहरण है कि सही किस्मों का चयन कर किसान ऑफ-सीजन में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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