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Kanpur News: होर्मुज जलमार्ग पर बढ़े तनाव का असर कानपुर के निर्यात कारोबार पर दिखाई देने लगा है. कारोबारियों के अनुसार 200 से 250 करोड़ रुपये का माल समुद्र और विभिन्न बंदरगाहों पर फंसा हुआ है. सबसे ज्यादा असर लेदर उद्योग पर पड़ा है, जबकि शिपिंग में देरी और संभावित अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क से निर्यातकों की चिंता और बढ़ गई है.
कानपुर: मिडिल ईस्ट देशों के साथ कारोबार करने वाले कानपुर के निर्यातकों के लिए एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं. होर्मुज जलमार्ग पर हालात बिगड़ने के बाद कई कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसका असर सीधे कानपुर के कारोबार पर पड़ रहा है. कारोबारियों के मुताबिक करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का माल समुद्र में या दूसरे बंदरगाहों पर फंस गया है और फिलहाल उसके आगे बढ़ने की कोई साफ तस्वीर नहीं है.फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि इस समय निर्यातकों के पास इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक मिडिल ईस्ट देशों के साथ कारोबार पहले की तरह चल पाना मुश्किल होगा.
10-15 दिन पहले भेजा गया सामान भी अटका
कारोबारियों का कहना है कि 10 से 15 दिन पहले जो माल जहाजों के जरिए भेजा गया था, वह अब बीच रास्ते या दूसरे बंदरगाहों पर रुक गया है. अचानक हालात बदलने से शिपिंग कंपनियों को अपने रूट बदलने पड़े हैं, जिससे सामान पहुंचने में देरी हो रही है और खर्च भी बढ़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर कानपुर के लेदर कारोबार पर पड़ रहा है. इसके अलावा कपड़ा, केमिकल, प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य सामग्री और अन्य सामान का निर्यात भी प्रभावित हुआ है. कई कारोबारी फिलहाल नए ऑर्डर लेने से भी बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि माल समय पर पहुंचेगा या नहीं.
कुछ दिनों की राहत के बाद फिर बढ़ीं मुश्किलें
निर्यातकों के लिए इस साल की शुरुआत से ही हालात आसान नहीं रहे हैं. फरवरी से जून के बीच भी कारोबार पर असर पड़ा था. इसके बाद 15 जून से हालात कुछ बेहतर हुए और कारोबार धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा था. लेकिन अब एक बार फिर पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है.कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर फैक्ट्रियों के कामकाज और रोजगार पर भी पड़ सकता है.
बढ़ सकता है कारोबार का खर्च
निर्यातकों की चिंता सिर्फ माल फंसने तक सीमित नहीं है. जहाजों पर अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क लगाए जाने की चर्चा भी चल रही है. अगर ऐसा होता है तो माल भेजने का खर्च और बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर निर्यातकों की जेब पर पड़ेगा.काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी का कहना है कि इस समय कारोबारी सिर्फ हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से निर्यातकों को लगातार वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और अब उन्हें सरकार से राहत और मदद की उम्मीद है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें