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जमशेदपुर का 100 साल पुराना बरगद, नीचे लगती 20 दुकानें, लोग कहते...


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Jamshedpur 100 Year Old Tree: जमशेदपुर के काशीडीह गोलचक्कर के पास बरगद का एक विशाल पेड़ है जिसके लिए लोग बताते हैं कि ये कम से कम 100 साल पुराना है. इसकी छांव इतनी घनी है और इतने लोग इसके नीचे पनाह पाते हैं कि इसे प्यार से ‘कुदरती छाता’ कहने लगे हैं.

जमशेदपुर. कभी स्कूल की किताबों में हमें सिखाया जाता था कि पेड़ लगाना क्यों जरूरी है. उस समय ये बातें सिर्फ पाठ्यक्रम का हिस्सा लगती थीं, लेकिन असल जिंदगी में जब हम तेज धूप में घर से बाहर निकलते हैं, तब पेड़ों की असली अहमियत समझ में आती है. झुलसाती गर्मी में एक पेड़ की छांव किसी वरदान से कम नहीं होती, और इसका जीता-जागता उदाहरण जमशेदपुर के काशीडीह गोलचक्कर के पास मौजूद एक विशाल बरगद का पेड़ है.

बताया जाता है कि यह बरगद का पेड़ 100 साल से भी अधिक पुराना है और आज भी पूरे इलाके के लोगों के लिए ‘कुदरती छाता’ का काम कर रहा है. इसकी घनी और फैली हुई शाखाएं इतनी बड़ी हैं कि इसके नीचे एक साथ कई लोग आराम से बैठ सकते हैं. यही कारण है कि स्थानीय लोगों ने इसे ‘कुदरती छाता’ का नाम दे दिया है.

पेड़ के नीचे बसा छोटा सा शहर
इस पेड़ की खास बात यह है कि यह सिर्फ छांव ही नहीं देता, बल्कि यहां एक छोटी सी जीवंत दुनिया भी बसती है. पेड़ के नीचे करीब 20 से अधिक छोटी-छोटी दुकानें रोजाना सजती हैं. इन दुकानों में फल-फ्रूट, चना-बादाम, ताजा जूस, सत्तू का शरबत, लस्सी, डोसा, इडली, लिट्टी-चोखा, चाय जैसी कई चीजें मिलती हैं. यहां से गुजरने वाले राहगीर और स्थानीय लोग इस पेड़ के नीचे रुककर न सिर्फ गर्मी से राहत पाते हैं, बल्कि स्वादिष्ट खान-पान का भी आनंद लेते हैं.

हर आपदा से बचाता है
इन दुकानदारों में से एक हैं हीरामन साहू, जो पिछले 35 वर्षों से इसी पेड़ के नीचे अपनी दुकान लगा रहे हैं. उनका कहना है कि इस बरगद के पेड़ की खासियत ही यही है कि चाहे कितनी भी तेज धूप हो या फिर मूसलाधार बारिश, इसके नीचे हमेशा ठंडक और सुकून मिलता है. यहां तक कि बर्फ के गोले जैसे सामान भी बिना किसी परेशानी के बेचे जाते हैं, क्योंकि पेड़ की छांव इतनी घनी है कि सीधी धूप अंदर तक नहीं पहुंच पाती.

स्थानीय लोगों के लिए यह पेड़ सिर्फ एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र भी है. कई लोग इसे भगवान का रूप मानते हैं और समय-समय पर यहां पूजा-अर्चना भी करते हैं. इस पेड़ के नीचे बैठकर लोगों को न सिर्फ शारीरिक राहत मिलती है, बल्कि मानसिक शांति का भी अनुभव होता है.

संदेश देता पेड़
आज के दौर में जब तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है, ऐसे में यह बरगद का पेड़ हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि पेड़ सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन के लिए भी कितने जरूरी हैं. यह ‘कुदरती छाता’ हमें याद दिलाता है कि अगर हम पेड़ों की रक्षा करेंगे, तो वे हमेशा हमारी रक्षा करते रहेंगे.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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