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भास्कर न्यूज | जामताड़ा जिले के विभिन्न प्रखंडों में 30 वर्ष पुराने जर्जर विद्यालय भवनों में आज भी पठन-पाठन जारी है। ऐसे 61 जर्जर विद्यालयों की सूची विभाग द्वारा तैयार किया गया है जहां विद्यालय भवन के प्लास्टर गिर रहे हैं दीवाल से पानी रिस रहा है। जहां 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय भवन के छतों की सरिया बाहर निकल आई है और बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं। लगातार रिसाव के कारण दीवारें और छतें कमजोर हो रही हैं। ऐसे माहौल में शिक्षक और विद्यार्थी भय के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई जगह अस्थायी मरम्मत के सहारे पढ़ाई जारी थी, लेकिन अब अधिकांश भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और मरम्मत भी संभव नहीं मानी जा रही है। ऐसे विद्यालय भवन को तोड़कर नए विद्यालय भवन निर्माण किया जाना है जिसके लिए जल्द ही सर्वे का काम किया जाएगा। शिक्षकों ने विभाग से जल्द नए भवन निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। विकास फंड की राशि नहीं मिलने से मरम्मत ठप विद्यालयों को मिलने वाली विकास फंड की राशि से हर साल मरम्मत कार्य किया जाता था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि नहीं मिलने से स्थिति और गंभीर हो गई है। विद्यालय प्रबंधन समितियों ने भी मरम्मत कराने में असमर्थता जताई है। इससे जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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