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झारखंड में पूरे एक दशक के लंबे इंतजार के बाद हो रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) ने इस बार इम्तिहान का मिजाज ही बदल दिया है। परीक्षा केंद्रों पर इस बार दो पीढ़ियां एक साथ किस्मत आजमाती नजर आएंगी। कई घरों में एक ही परिवार से 6-6 सदस्य इस परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। कहीं मां अपने बेटे या बेटी के साथ परीक्षा की तैयारी कर रही हैं तो कहीं सास-बहू दोनों शिक्षक बनने के सपने को साकार करने के लिए तैयारी में जुटी हैं। दस साल पहले जो अभ्यर्थी अकेले आवेदन की कतार में खड़े थे, 10 साल की सरकारी सुस्ती के बाद आज उनके बच्चों, बहुओं और जीवनसाथी को भी उसी कतार में उनका सहपाठी बना दिया है। पारा शिक्षक पिता से मिली प्रेरणा, अब पिता -पुत्र दोनों एक साथ देंगे शिक्षक पात्रता परीक्षा पिता को पारा शिक्षक के रूप में देखकर आशीष कुमार ने भी इसी पेशे को अपना लक्ष्य बनाया। अब संयोग ऐसा है कि पिता सीताराम यादव और पुत्र आशीष कुमार एक साथ परीक्षा में शामिल होंगे। दोनों की तैयारी भी साथ-साथ चल रही है। सीताराम यादव गिरिडीह में रहते हैं, जबकि आशीष पिछले एक महीने से हजारीबाग में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। पढ़ाई के दौरान जब भी किसी सवाल को समझने में परेशानी होती है, तो आशीष फोन पर पिता से मदद लेते हैं। पिता न केवल उनके सवालों का समाधान करते हैं, बल्कि तैयारी में मार्गदर्शन भी देते हैं। 10 साल बाद फिर आजमाएंगे किस्मत, पत्नी भी देंगी परीक्षा गिरिडीह जिले के प्रवेश कुमार पेशे से पारा शिक्षक हैं। वे इस बार झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में शामिल होंगे। उनकी पत्नी भी परीक्षा देंगी। प्रवेश कुमार वर्ष 2004 से पारा शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने 2016 में भी जेटेट की परीक्षा दी थी। उनका कहना है कि परीक्षा में 10 साल के लंबे अंतराल का अभ्यर्थियों के सामाजिक और मानसिक जीवन पर असर पड़ा है। इतने वर्षों बाद पढ़ाई की चीजों को याद रखने में भी परेशानी होती है। ऐसे में आज के युवाओं से मुकाबला करना थोड़ा मुश्किल जरूर है। तीन भाई, एक बहन और दो भाभियां एक साथ परीक्षा में बैठेंगे, घर में कर रहे हैं सामूहिक तैयारी जेटेट में रूपेश कुमार पाल के परिवार के छह सदस्य एक साथ शामिल होंगे। इनमें रूपेश, उनके बड़े भाई जितेंद्र पाल, छोटे भाई विवेक कुमार पाल, बहन ब्यूटी कुमारी और दो भाभी बेबी पाल व चमेली पाल शामिल हैं। रूपेश रांची में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गढ़वा जिले में रहकर तैयारी कर रहे हैं। परिवार में पढ़ाई के दौरान किसी को किसी विषय में परेशानी होती है, तो दूसरे सदस्य उसकी मदद करते हैं। बड़े भाई जितेंद्र पाल पारा शिक्षक हैं और घर के छोटे सदस्यों को मार्गदर्शन देते हैं।
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