जौनपुरः गजब है भाई, जौनपुर के RTO कार्यालय में बिना पैसे के कोई काम नहीं होता? अपने पांच नए ट्रेलरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर, 50 हजार की मांग से नाराज मड़ियाहूं निवासी वाहन स्वामी विनय कुमार सिंह ने अपने पांचों ट्रेलर RTO कार्यालय के बाहर खड़े कर गेट और रास्ता जाम कर दिया. मामला सामने आते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया. वाहन स्वामी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे प्रति गाड़ी 10 हजार मांगे जा रहे थे. वहीं अधिकारियों ने मामले की जांच कराने की बात कही है.
विनय कुमार सिंहने बताया कि उन्होंने करीब छह करोड़ रुपये की लागत से पांच नए ट्रेलर खरीदे हैं. इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वह पिछले कई दिनों से RTO कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं. उनका आरोप है कि RI ने पूरी गाड़ी की जांच करने के बाद उसे फिटनेस के लिए ओके कर दिया, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन का काम आगे नहीं बढ़ाया गया.
पंजीकरण का वैध शुल्क देने को तैयार
विनय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यालय में गणेश बाबू नाम के कर्मचारी ने पांचों गाड़ियों के लिए 50 हजार की मांग की. यानी कथित तौर पर प्रत्येक गाड़ी के लिए 10 हजार रुपये. उनका कहना है कि अगर रजिस्ट्रेशन के लिए कोई वैध शुल्क है तो वह उसे देने को तैयार हैं, लेकिन अतिरिक्त रकम क्यों मांगी जा रही है, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा. वाहन स्वामी ने कहा कि उनके घर में तेरहवीं थी, जिसके कारण वह तीन दिन कार्यालय नहीं आ सके. इस दौरान उन्होंने फोन पर भी अधिकारियों से अनुरोध किया कि वह मजबूरी में घर पर हैं, इसलिए वाहनों का काम कर दिया जाए. उनका आरोप है कि उन्हें बार-बार अगले दिन काम होने का भरोसा दिया गया, लेकिन जब वह कार्यालय पहुंचे तो अधिकारी के लखनऊ जाने की बात कही गई.
विनय सिंह ने कहा, हमने क्या गुनाह किया कि पांच गाड़ी खरीदीं? करीब छह करोड़ रुपये की गाड़ी ली है. एजेंसी को पूरा पैसा देना पड़ा. अब गाड़ी यहां चार दिन से खड़ी है और ऊपर से पैसे की मांग की जा रही है.
पहले से हैं 20 ट्रक, नहीं हुई परेशानी
उन्होंने बताया कि उनके पास पहले से करीब 20 ट्रक हैं और पहले उन्हें इस तरह की परेशानी नहीं हुई. उनका आरोप है कि जौनपुर में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में परेशानियों के चलते कई वाहन मालिक अपनी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन बिहार में कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं. जाम लगाने को लेकर पूछे जाने पर विनय सिंह ने कहा कि वह गाड़ी सड़क पर नहीं चलाना चाहते. जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, वह वाहनों को खड़ा रखेंगे. उन्होंने कहा कि यदि विभाग को लगता है कि उनकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता तो चाबी ले लें, लेकिन उन्हें स्पष्ट बताया जाए कि आखिर उनकी गलती क्या है. उन्होंने मामले की शिकायत RI से भी की. उनका कहना है कि RI ने बताया कि वह वाहनों को पहले ही जांच के बाद ओके कर चुके हैं, लेकिन संबंधित बाबू ने काम आगे नहीं बढ़ाया.
कार्यप्रणाली पर उठा सवाल
मामले में जांच कराने की बात कही गई है. बताया गया कि पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी. वहीं RI की ओर से भी वाहन की जांच किए जाने की बात सामने आई है. अब इस पूरे मामले ने जौनपुर के RTO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या वास्तव में बिना पैसे के रजिस्ट्रेशन का काम नहीं होता? क्या वाहन स्वामियों को अपने काम के लिए अतिरिक्त रकम देनी पड़ती है?