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झारखंड का बारनी घाट जहां देवताओं ने किया था विश्राम! पत्थरों पर...


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बारनी घाट की सबसे खास पहचान यहां की विशाल प्राकृतिक चट्टानों पर बने धार्मिक प्रतीक और आकृतियां हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इन चट्टानों पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की आकृतियां उकेरी गई हैं. इसके अलावा यहां शंख और चरण पादुका जैसे कई धार्मिक चिन्ह भी दिखाई देते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बने हुए हैं.

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट, जिसे स्थानीय लोग बारुनी घाट के नाम से भी जानते हैं, आस्था, इतिहास और लोकमान्यताओं का एक अनोखा केंद्र है. प्राकृतिक चट्टानों पर बने रहस्यमयी चिन्ह, देवी-देवताओं की आकृतियां और एक ही स्थान पर मौजूद कई शिवलिंग इस स्थल को खास पहचान देते हैं. यही वजह है कि यह घाट श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

विशाल चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां
बारनी घाट की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इनमें भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की छवियां दिखाई देती हैं. इसके अलावा चट्टानों पर शंख, चरण पादुका और अन्य धार्मिक प्रतीकों जैसे कई निशान भी मौजूद हैं, जो लोगों के बीच जिज्ञासा और श्रद्धा का विषय बने हुए हैं.

धार्मिक चिन्ह कई पीढ़ियों से मौजूद
कुमरी गांव निवासी अतुल महतो बताते हैं कि घाट पर मौजूद स्वयंभू शिवलिंग और प्राचीन धार्मिक चिन्ह कई पीढ़ियों से यहां मौजूद हैं. गांव के बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार इस स्थल का धार्मिक महत्व बहुत पुराना है. हर वर्ष चैती महीने में यहां भव्य बारनी मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बोकारो सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं.

देवताओं ने इस स्थान पर विश्राम किया था
स्थानीय ग्रामीण विशाल राय के अनुसार बारनी घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोककथाओं और प्राचीन मान्यताओं का भी केंद्र है. स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि किसी प्राचीन काल में देवी-देवताओं ने इस स्थान पर विश्राम किया था. उसी दौरान उनके चरणों के निशान चट्टानों पर अंकित हो गए, जिन्हें आज भी श्रद्धालु चरण पादुका के रूप में पूजते हैं. वहीं एक ही स्थान पर कई शिवलिंगों की मौजूदगी इस घाट को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.

श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र
घाट परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां प्रतिदिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बारनी घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक सड़क मार्ग के जरिए कुमरी गांव पहुंच सकते हैं. प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और रहस्यमयी प्रतीकों से भरपूर यह स्थल बोकारो के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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