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झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भांग को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत प्रतिबंधित कैनबिस (गांजा) की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा पाए सुनील सिंह को बरी कर दिया। मालूम हो कि पुलिस ने आरोपी के सूटकेस से 12 पॉलीथीन पैकेटों में करीब 11 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद होने का दावा किया था। इसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि जब्त पदार्थ गांजा नहीं, बल्कि भांग था, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं है। हाईकोर्ट ने अधिनियम की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून में चरस और गांजा को प्रतिबंधित मादक पदार्थ माना गया है, जबकि भांग को जानबूझकर इस परिभाषा से बाहर रखा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि बरामद भांग चरस, गांजा या गांजे के फूलों से तैयार की गई थी।
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