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ट्रेजरी घोटाले की जांच अब छोटे कारोबारियों तक पहुंच गई है। सीआईडी डिजिटल ट्रांजेक्शन की कड़ियां खंगाल रही है। इसी दौरान बोकारो के 100 से अधिक छोटे-बड़े कारोबारियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। इनमें फुटपाथ पर चाय बेचने वाले, फल और नारियल विक्रेता, आइसक्रीम, चिकन और राशन दुकानदार से लेकर रेस्टोरेंट संचालक व उनके कर्मचारी तक शामिल हैं। अचानक खाते बंद होने से कई कारोबारियों के सामने रोजमर्रा का व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि वे सामान्य रूप से ग्राहकों से यूपीआई और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से पेमेंट लेते थे। बाद में बैंक पहुंचने पर पता चला कि उनके खाते में ट्रेजरी घोटाले से जुड़ी संदिग्ध राशि आने के कारण सीआईडी रांची के निर्देश पर खाते होल्ड कर दिए गए हैं। फिलहाल अधिकांश लोग बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाते कब तक चालू होंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जांच में सामने आया है कि ट्रेजरी घोटाले के आरोपी अकाउंटेंट कौशल पांडेय, होमगार्ड काजल मंडल, सतीश कुमार और एएसआई अशोक भंडारी समेत अन्य आरोपियों के खातों से विभिन्न दुकानों और प्रतिष्ठानों में ऑनलाइन भुगतान किए गए थे। अब सीआईडी उसी रकम की पूरी ट्रांजेक्शन चेन की जांच कर रही है। इसी प्रक्रिया में कई ऐसे कारोबारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं, जिन्होंने सामान्य ग्राहक समझकर ऑनलाइन भुगतान स्वीकार किया था। सूत्रों के अनुसार, सीआईडी अब डिजिटल ट्रांजेक्शन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। वहीं, बैंक अधिकारियों से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। चिकेन विक्रेता व राशन दुकानदार के खाते होल्ड पर रखे नया मोड़ के चाय दुकानदार विवेक कुमार ने बताया कि बैंक ने जानकारी दी कि उनके खाते में घोटाले से जुड़ी राशि आई है। जांच पूरी होने तक खाता फ्रीज रहेगा। सेक्टर-1 राम मंदिर चौक के नारियल विक्रेता भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि एक ग्राहक से ऑनलाइन भुगतान लेने के बाद उनका खाता होल्ड पर है। चिकन दुकानदार, राशन दुकानदार नवीन कुमार भी जांच के दायरे में हैं। रेस्टोरेंट संचालक व 10 कर्मचारियों के खाते फ्रीज किए कैंप-2 स्थित एक रेस्टोरेंट के संचालक और वहां काम करने वाले 10 से अधिक कर्मचारियों के बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए गए हैं। कर्मचारी केदार डे ने बताया कि ट्रेजरी घोटाले से जुड़े कुछ लोग रेस्टोरेंट में पार्टी करते थे और ऑनलाइन भुगतान करते थे। जांच के दौरान उन्हीं ट्रांजेक्शन के आधार पर बैंक खातों पर होल्ड लगा दिया गया।
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