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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। इसके बाद लखनऊ दहलाने की साजिश थी। दुबई में बैठे तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) के सदस्य आवेश राजपूत उर्फ राणा और सहजाद उर्फ शाहनवाज आलम उर्फ भट्ठी ने इसका फरमान जारी कर दिया था। इसके लिए अमन अंसारी उर्फ गोलू और सैफ अंसारी 17 जून को दोपहर ट्रेन से कानपुर रवाना भी हो गया था। लेकिन रांची पुलिस ने दोनों को गझंडी स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में अमन अंसारी ने यह खुलासा किया। उसने बताया कि सितंबर 2025 में वह नौकरी के लिए मुंबई गया था। वहां से जिशान नामक एजेंट ने दुबई भेज दिया। वहां मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी कंपनी में एसी बनाने का काम मिला। वीजा समाप्त होने के बाद कंपनी के सुपरवाइजर अहमद अली ने इसी साल उसे वापस मुंबई भेज दिया। फिर वहां से झारखंड लौट आया। यहां आने के बाद अहमद अली ने ही राणा से फोन पर संपर्क कराया। उसे आरएसएस कार्यालय पर बम फेंकने के लिए तीन लड़कों को तैयार करने के लिए कहा गया। इसकी एवज में पैसे देने की बात कही गई। आरोपियों के ठिकाने पर एटीएस की छापेमारी, परिजनों से भी हुई पूछताछ झारखंड एटीएस की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह लोहरदगा स्थित सैफ अंसारी आैर अमन अंसारी के अलावा रांची में सायन सुजान के घर पर छापेमारी की। एटीएस की एक टीम ने लोहरदगा स्थित दोनों आरोपियों के घर की तलाशी ली। एक-एक सामान की जांच की। इसके बाद घर में मौजूद सैफ के बड़े भाई चांद अंसारी से लंबी पूछताछ भी की। आरोपी अमन की मां से भी कई सवाल किए। एटीएस की दूसरी टीम लोअर बाजार थाना क्षेत्र के कर्बला चौक के पथलकुदवा में सायम सुजान के घर पहुंची जहां घर के एक-एक कोने में गहन तलाशी ली। पहले गोली चलवाने की योजना थी, हथियार नहीं मिला, बदला प्लान अमन ने पुलिस को बताया कि राणा और भट्ठी पहले गोली चलवाकर दहशत फैलाना चाहते था। इसके लिए पाकिस्तान से हथियार रांची भेजने का प्लान था। अमन 8 जून को टाटा-अमृतसर एक्सप्रेस से अमृतसर के लिए निकला। लेकिन डालटनगंज में आनंद विहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। वह 10 जून को अमृतसर पहुंचा और राजू मेहता के होटल में रुका। इसके बाद राणा ने फोन कर बताया कि हथियार उपलब्ध नहीं हो पाया है, वापस लौट जाआे। 12 जून को वह रवाना हुआ और दिल्ली से ट्रेन पकड़कर लोहरदगा आ गया। फिर प्लान बदला। राणा ने पेट्रोल बम से हमला करने का आदेश दिया। मोबाइल अमन के पास, दुबई से वॉट्सएप चला रहा था राणा अमन अंसारी ने बताया कि अपने दोस्त हैदर अली से एक मोबाईल आैर सिमकार्ड 9334314899 लिया था। हैदर ने यह मोबाइल आैर सिमकार्ड लोहरदगा में रहने वाले एक युवक से गिरवी के रूप में रखा था। युवक ने पैसे देने में देर की तो हैदर ने वह मोबाइल अमन को बेच दिया। अमन इस नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों को फोन करने में करता था। जबकि दुबई में बैठा राणा 10 जून के बाद इसी नंबर से वाट्सएप अकाउंट बनाकर इस्तेमाल कर रहा था। वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए अमन ने ही राणा को ओटीपी उपलब्ध कराया था। अमन ने पुलिस को बताया कि दुबई से राणा ने 15 जून की रात उसके वॉट्सएप पर रांची आरएसएस कार्यालय का फोटो और लोकेशन भेजा। पेट्रोल बम फेंक कर आरएसएस कार्यालय में आग लगाने का निर्देश दिया। तय योजना के अनुसार सैफ और अमन 16 जून की रात अपने दोस्त सायम सुजान के साथ आरएसएस कार्यालय के पास पहुंचा। सैफ ने पेट्रोल बम फेंका, जबकि अमन पूरी घटना का वीडियो बना रहा था। पहला बम नहीं फटा, जिसकी सूचना राणा को दी। सुनते ही राणा भड़क गया और दूसरा बम फेंकने को कहा। दूसरा बम फेंकने के बाद धमाका हुआ तो तीनों वहां से फरार हो गए। अगले दिन सुबह राणा ने फोन कर कहा-वहां से निकलकर कानपुर चले जाओ। कानपुर से लखनऊ जाकर दूसरी घटना को अंजाम देना है।
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