इस विकराल समस्या पर भाजपा तेलो मंडल अध्यक्ष सुरेश कुशवाहा ने कहा कि यह विद्यालय इस क्षेत्र के लिए गौरव है। लेकिन शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इसके कारण विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है। इस विकट समस्या को लेकर शिक्षा विभाग डीईओ से बात कर कर जल्द ही शिक्षकों की बहाली करवाई जाएगी। साथ ही बिल्डिंग का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि संवेदक ने दरारों को प्लास्टर और पुट्टी से छिपाने की कोशिश की, लेकिन प्लास्टर छूते ही झड़ने लगा। एक तरफ शिक्षकों के अभाव में बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है, वहीं 6.80 करोड़ खर्च करके बनी बिल्डिंग कागज की तरह चरमरा रही है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बच्चों के भविष्य और सरकारी पैसे दोनों से खिलवाड़ है। जिला शिक्षा पदाधिकारी की नाक के नीचे ये सब हो गया, लेकिन उनका ध्यान नहीं है। डीईओ से मिलकर जल्द से जल्द शिक्षकों की बहाली और भवन की जांच की मांग करूंगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय चक्रवर्ती ने कहा कि शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है। भास्कर न्यूज । तेलो चंद्रपुरा प्रखंड के तेलो मध्य पंचायत में स्थित उत्क्रमित नेहरू प्लस टू उच्च विद्यालय जर्जर अवस्था में है। 1957 में स्थापित होकर क्षेत्र के हजारों छात्रों को शिक्षा देने वाला यह विद्यालय अब शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। 650 छात्रों की पढ़ाई का जिम्मा सिर्फ 4 शिक्षकों पर है, जिसमें 2 शिक्षकों के भरोसे ही रोजाना क्लास चल रही है। वहीं 6.80 करोड़ की लागत से बनी नई बिल्डिंग में हैंडओवर से पहले ही दरार हो गई है। वर्तमान में स्कूल में कुल 650 छात्र नामांकित हैं। लेकिन शिक्षक सिर्फ 4 ही पदस्थापित हैं, इनमें1 फिजिकल टीचर, 1 हिंदी टीचर,1 इतिहास टीचर और 1 हेडमास्टर हैं। हेडमास्टर अजय चक्रवर्ती को रोजाना विद्यालय एवं अन्य सरकारी कामों में उलझा रहना पड़ता है। नतीजा ये कि असल में 650 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 2 विषय शिक्षक ही बचते हैं। डिजिटल युग में जब स्मार्ट क्लास और लैब की बात होती है, वहां तेलो स्कूल में बच्चे बारी-बारी से क्लास में बैठकर समय गुजार रहे हैं। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए अब तक पद सृजन नहीं होने से कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय के लिए एक भी विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं है।
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