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जिला प्रशासन 10 कार्य दिवसों में देगा रिपोर्ट राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल और आयुष महाविद्यालयों में नीट-यूजी/पीजी नामांकन में फर्जी प्रमाण-पत्र के इस्तेमाल पर अब सख्ती होगी। स्वास्थ्य विभाग ने प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की है। जाति, आय, स्थानीय निवास और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का संबंधित सरकारी ऑनलाइन पोर्टल से सत्यापन होगा। प्रमाण-पत्र संदिग्ध मिलने पर संबंधित उपायुक्त को भेजा जाएगा। जिला प्रशासन 10 कार्य दिवस में भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट देगा। संदिग्ध प्रमाण-पत्र की जांच पूरी होने तक अभ्यर्थी को औपबंधिक नामांकन मिलेगा। सत्यापन सही पाए जाने पर ही दाखिला अंतिम होगा। 3 श्रेणियों के लिए बनीं समितियां जेसीईसीईबी स्तर पर मेडिकल, डेंटल और आयुष नामांकन के लिए अलग-अलग उच्चस्तरीय समितियां गठित होंगी। मेडिकल समिति में रिम्स व सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नामांकन प्रभारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि होंगे। डेंटल समिति में रिम्स व सरकारी डेंटल कॉलेजों के नामांकन प्रभारी और आयुष समिति में सरकारी आयुष कॉलेजों के नामांकन प्रभारी शामिल होंगे। विशेष कार्य पदाधिकारी, जेसीईसीईबी सदस्य सचिव होंगे। कॉलेज में भी होगी दोबारा जांच
रिम्स समेत प्रत्येक संबंधित कॉलेज में संस्थान स्तर पर समिति मूल प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच करेगी। निदेशक/प्राचार्य/डीन अध्यक्ष, अधीक्षक सदस्य और नामांकन प्रभारी सदस्य सचिव होंगे। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तत्काल रद्द करेंगे दाखिला फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर प्राचार्य नामांकन रद्द करेंगे और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। डिजिटल व भौतिक दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे। व्यवस्था रिम्स समेत सभी सरकारी-निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी कॉलेजों में तत्काल लागू होगी।
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