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देवघर की रोड ट्रिप में एक ही सफर में मिलेंगे बाबाधाम ज्योतिर्लिंग की आस्था, त्रिकुट पहाड़ का एडवेंचर और पुनाशी डैम का सुकून.अगर आप भी वीकेंड को बनाना चाहते हैं यादगार, तो देवघर का हम आपको एक शानदार रूट बताने जा रहे हैं. इसी रास्ते में तपोवन पहाड़ भी आता है, जो अपने रहस्यमयी गुफाओं और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कुल 11 रहस्यमयी गुफाएं और 9 मंदिर हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं. पहाड़ पर चढ़ने के लिए करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यहां स्थित तपोनाथ मंदिर और पत्थरों के बीच बना बजरंगबली मंदिर लोगों को खास आकर्षित करता है. अगर आपको मंदिर और पहाड़ एकसाथ घूमना पसंद है तो यहां रोड ट्रिप कर जरूर पहुंचें. यह शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
अगर आप शाम के समय शांत और सुकून भरा माहौल पसंद करते हैं तो पुनासी डैम का रोड ट्रिप आपके लिए एकदम परफेक्ट है. यह डैम शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर पुनासी गांव के पास स्थित है. खासकर गर्मी के दिनों में यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है. डैम के किनारे बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेना और डूबते सूरज को देखना मन को एक अलग ही शांति देता है. आसपास का प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण इसे एक बेहतरीन रिलैक्सिंग स्पॉट बनाता है, जहां लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ सुकून भरे पल बिताने आते हैं.
सबसे पहले बात करते हैं बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग की, जो देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह मंदिर जसीडीह रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां देशभर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. रोड ट्रिप के जरिए यहां पहुंचना बेहद आसान है और रास्ते का सफर भी उतना ही सुखद होता है.
इसी रास्ते में तपोवन पहाड़ भी आता है, जो अपने रहस्यमयी गुफाओं और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कुल 11 रहस्यमयी गुफाएं और 9 मंदिर हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं. पहाड़ पर चढ़ने के लिए करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यहां स्थित तपोनाथ मंदिर और पत्थरों के बीच बना बजरंगबली मंदिर लोगों को खास आकर्षित करता है. अगर आपको मंदिर और पहाड़ एकसाथ घूमना पसंद है तो यहां रोड ट्रिप कर जरूर पहुंचें. यह शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
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इसके बाद आप जा सकते हैं बासुकीनाथ धाम, जो दुमका जिले में स्थित है और देवघर से लगभग 55 किलोमीटर दूर है. कहा जाता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद यहां पूजा करना जरूरी होता है तभी आपकी यात्रा पूर्ण मानी जाती है. रास्ते में हरियाली और ग्रामीण परिवेश आपका मन मोह लेगा, जिससे सफर भी यादगार बन जाता है. जो भी भक्त देवघर पूजा करते हैं वो बासुकीनाथ धाम पूजा करने जरूर आते हैं.
अगर आप भी रोड ट्रिप के शौकीन हैं, तो देवघर आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. देवों की नगरी के नाम से मशहूर यह शहर आस्था, प्रकृति और एडवेंचर का शानदार संगम है. यहां सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि खूबसूरत पहाड़, हरियाली और शांत वातावरण भी आपका दिल जीत लेते हैं. खास बात यह है कि यहां हर जगह सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिससे रोड ट्रिप का मज़ा दोगुना हो जाता है.
वहीं अगर आप हरियाली और जंगल के बीच घूमने का शौक रखते हैं, तो देवघर बायोडायवर्सिटी पार्क आपके लिए शानदार विकल्प है. यह पार्क देवघर-जमुई हाईवे पर शहर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. घने जंगलों के बीच बना यह पार्क प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है. यहां की साफ-सुथरी पगडंडियां, पेड़-पौधों की विविधता और शांत वातावरण आपको शहर की भीड़-भाड़ से दूर एक नया अनुभव देता है. रोड ट्रिप करके यहां पहुंचना आसान है और एक दिन की सैर के लिए यह जगह बिल्कुल उपयुक्त मानी जाती है.
दुमका पहुंचने के बाद दुमका का मसानजोर डैम घूमना ना भूलें जो हरी भरी वादियों के बीच में डैम के ठीक किनारे इकोकॉटेज ठहरने के लिए बनाया गया है. साथ ही यहां नौकाविहार का लुफ्त उठा सकते हैं. इसके साथ ही सेल्फी ब्रिज दुमका घूमना बिल्कुल न भूलें खासकर शाम के समय यह जगह बेहद खूबसूरत लगती है. चारों तरफ पहाड़, जंगल और ठंडी हवा आपको एक अलग ही सुकून का एहसास कराती है. यहां लोग दूर-दूर से घूमने और यादगार तस्वीरें लेने आते हैं.
वापसी के दौरान त्रिकुट पहाड़ जरूर जाएं, जो देवघर से लगभग 17 किलोमीटर दूर है. यहां कभी झारखंड का पहला रोपवे हुआ करता था, लेकिन अप्रैल 2022 मे हादसा होने के बाद फिलहाल अभी तक बंद है. आज भी लोग पैदल ट्रैकिंग कर पहाड़ की चोटी तक पहुंचते हैं. ऊपर भगवान शिव का मंदिर और चारों ओर फैली वादियां इस जगह को खास बनाती हैं. यहां का एडवेंचर और प्राकृतिक सुंदरता हर किसी को आकर्षित करती है. यहां बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि जगहों से सैलानी घूमने आते हैं.