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Shravani Mela 2026: देवघर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 का शुभारंभ हो गया है. इसके साथ ही बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. आज गुरु पूर्णिमा होने के कारण मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं. देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण और स्पर्श पूजा के लिए मंदिर पहुंचे. पूरा देवघर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा.
गुरु पूर्णिमा का दिन बाबा बैद्यनाथ धाम में विशेष महत्व रखता है. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्पर्श पूजा करते हैं. यही वजह है कि सुबह से मंदिर परिसर में काफी भीड़ देखने को मिली. श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए कतार में खड़े रहे. जिला प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगमता से जलार्पण कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पुरोहित लंबोदर महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का दिन बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने कहा कि आज स्पर्श पूजा का अंतिम दिन है. इसके बाद श्रावणी मेले के दौरान अगले एक महीने तक मंदिर में स्पर्श पूजा पूरी तरह बंद रहेगी. अत्यधिक भीड़ को देखते हुए मंदिर में अर्घा की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी. इसके बाद श्रद्धालु अर्घा के माध्यम से ही बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे.
पुरोहित ने यह भी कहा कि कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि स्पर्श पूजा नहीं कर पाने से कहीं उनका पुण्य कम तो नहीं हो जाएगा. उन्होंने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. उनके अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचना, पंचशूल का दर्शन करना और श्रद्धा के साथ जलार्पण करना भी उतना ही पुण्यदायी माना जाता है, जितना स्पर्श पूजा करना. इसलिए श्रद्धालुओं को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है.
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श्रावणी मेला शुरू होते ही देवघर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आने वाले कांवरिये लगातार बाबा धाम पहुंच रहे हैं. कंधे पर कांवर और मुख पर ‘बोल बम’ का जयघोष लिए श्रद्धालु लंबी पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा के दरबार में जल अर्पित कर रहे हैं. मंदिर परिसर और आसपास का पूरा इलाका शिवभक्ति में डूबा नजर आ रहा है.
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. कतार प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन और जलार्पण के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े. मंदिर पहुंचे कई कांवरियों ने बताया कि उनकी बाबा भोलेनाथ में अटूट आस्था है. उनका कहना है कि हर वर्ष वे बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल चढ़ाने आते हैं. उनका विश्वास है कि बाबा उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
वहीं, कई श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन बाबा धाम पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है. बाबा के दर्शन के बाद उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है. श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं. यही विश्वास हर साल लाखों कांवरियों को देवघर खींच लाता है.