रांची. झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव बेहद रोचक होने जा रहा है. इस चुनाव को लेकर नामांकन भरने की आखिरी तारीख 8 जून (सोमवार) है. ऐसे में बतौर प्रत्याशी जो भी नामांकन भरेंगे, उन्हें अपने साथ 10% या फिर 10 विधायकों के प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर लेकर जाने होंगे. नियम के अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रत्याशी के लिए 10% विधायकों का हस्ताक्षर प्रस्तावक के तौर पर चाहिए. ऐसे में झारखंड विधानसभा की क्षमता के अनुसार कुल 9 विधायकों का हस्ताक्षर प्रस्तावक के तौर पर जरूरी होगा. लेकिन, निर्दलीय प्रत्याशी के लिए 10 विधायकों के बतौर प्रस्तावक हस्ताक्षर की जरूरत होगी. ऐसे में देखना दिलचस्प है कि कल 8 जून को नामांकन भरने कितने प्रत्याशी झारखंड विधानसभा पहुंचते हैं.
बता दें कि नामांकन भरने के वक्त प्रस्तावक के तौर पर विधायकों को साथ लाना जरूरी नहीं है। उनके हस्ताक्षर ही काफी होते हैं.
‘इंडिया’ गठबंधन के अंदरूनी समीकरण और टेंशन
दरअसल, इस चुनावी दंगल का असली रोमांच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर छिपी रार से पैदा हुआ है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना पहला उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करेंगे. पेंच दूसरी सीट को लेकर फंसा है. कांग्रेस ने केंद्रीय नेतृत्व के करीबी प्रणव झा को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है. इसके विपरीत, झामुमो के कई विधायक अड़े हुए हैं कि पार्टी को दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने चाहिए. झामुमो नेताओं का तर्क है कि सदन में उनके पास 34 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल 16 सदस्य हैं. ऐसे में संख्या बल के आधार पर वे दोनों सीटें जीतने की क्षमता रखते हैं. इस खींचतान को सुलझाने के लिए कांग्रेस ने आनन-फानन में भूपेश बघेल को बतौर पर्यवेक्षक रांची भेजा है.
एनडीए का गणित और क्रॉस वोटिंग का डर
दूसरी तरफ, विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में मुख्य भूमिका निभा रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी एक सीट पर अपना दावा ठोक रही है. यह सीट बीजेपी के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है. बता दें कि विधानसभा में एनडीए के पास कुल 24 विधायक (बीजेपी के 21 और आजसू, लोजपा और जदयू के 1-1) हैं. किसी भी एक उम्मीदवार की सीधी जीत के लिए कम से कम 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है.
इंडिया ब्लॉक का समीकरण भी समझिए
वहीं, ‘इंडिया’ ब्लॉक के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त हैं. लेकिन यदि झामुमो और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बनी या किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने पैर पसारे, तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा. यहां यह भी जानना जरूरी है कि झारखंड का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि राज्यसभा चुनावों में विधायकों की ‘अंतरात्मा की आवाज’ और क्रॉस वोटिंग बड़ा उलटफेर कर देती है.
चुनावी कार्यक्रम पर एक नजर
झारखंड विधानसभा की इन दो सीटों के लिए चुनाव आयोग ने बेहद सख्त और स्पष्ट टाइमलाइन तय की है:
- 8 जून: नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि.
- 9 जून: स्क्रूटनी यानी नामांकन पत्रों की जांच.
- 11 जून: नाम वापस लेने की अंतिम तिथि.
- 18 जून: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और इसी दिन परिणाम (मतगणना).
क्या तीसरा उम्मीदवार बढ़ाएगा रोमांच?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है. यदि केवल दो सीटों के लिए दो प्रमुख उम्मीदवार ही मैदान में रहते हैं तो चुनाव लगभग निर्विरोध जैसा हो सकता है. लेकिन अगर कोई निर्दलीय या किसी छोटे दल का उम्मीदवार नामांकन दाखिल करता है तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. हालांकि ऐसा करने के लिए कम से कम 10 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा. यही कारण है कि राजनीतिक पर्यवेक्षक नामांकन के अंतिम दिन पर विशेष नजर बनाए हुए हैं.
सत्ता पक्ष और विपक्ष की रणनीति
जानकार कहते हैं कि सत्तारूढ़ गठबंधन की कोशिश होगी कि चुनाव बिना किसी अनावश्यक जोखिम के संपन्न हो. वहीं विपक्ष भी अपने संख्या बल के अनुसार अधिकतम राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर काम कर सकता है. राज्यसभा चुनाव केवल सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं होता. यह विधानसभा के भीतर दलों की वास्तविक ताकत, गठबंधन की मजबूती और राजनीतिक अनुशासन की भी परीक्षा माना जाता है. इसलिए राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने पर विशेष ध्यान देते हैं.
नामांकन के बाद साफ होगी तस्वीर
8 जून को नामांकन की समय सीमा समाप्त होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुकाबला कितना बड़ा और कितना रोचक होने वाला है. यदि अतिरिक्त उम्मीदवार सामने आते हैं तो विधायकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी. वहीं यदि प्रमुख दलों के उम्मीदवारों तक ही मुकाबला सीमित रहता है तो परिणाम लगभग तय माने जाएंगे.
झारखंड विधानसभा से राज्यसभा चुनाव का समीकरण
फिलहाल झारखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चुनाव केवल औपचारिकता बनकर रहेगा या फिर नामांकन के अंतिम दिन कोई ऐसा राजनीतिक दांव चलेगा जो राज्यसभा चुनाव को सुर्खियों में ला दे. अब देखना दिलचस्प होगा कि नामांकन के आखिरी दिन कितने सूरमा विधानसभा सचिव के समक्ष अपना पर्चा दाखिल करते हैं और क्या प्रस्तावक जुटाने की इस परीक्षा में निर्दलीय या असंतुष्ट गुट कोई नया गुल खिला पाते हैं.