Last Updated:
पलामू के किसान सूर्यदेव विश्वकर्मा ने यूट्यूब से आइडिया लेकर राजस्थान से रीपर मशीन मंगाई है. इस मशीन से धान की कटाई बहुत आसान हो गई है. इससे समय और मजदूरों की बचत होती है. मशीन से रोजाना दो से तीन हजार रुपये की कमाई भी हो रही है.
पलामूः परंपरागत खेती के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता खोल रहा है. पलामू जिले के सलखनी गांव के किसान सूर्यदेव विश्वकर्मा इसकी मिसाल बनकर उभरे हैं. उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर धान की कटाई करने वाली रीपर मशीन खरीदने का फैसला किया और राजस्थान से मशीन मंगवाई. आज यही मशीन उनके लिए कमाई का एक मजबूत जरिया बन गई है. इस मशीन की मदद से न केवल धान की कटाई का काम आसान हुआ है, बल्कि आसपास के किसानों को भी कम समय में फसल काटने की सुविधा मिल रही है.
धान की कटाई में समय और मेहनत की बचत
धान की कटाई के दौरान किसानों को मजदूरों की कमी और अधिक समय लगने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में डीजल से चलने वाली रीपर मशीन काफी उपयोगी साबित हो रही है. पलामू जिले के सूर्यदेव विश्वकर्मा ने कहा कि यह मशीन एक एकड़ खेत में लगभग एक से डेढ़ घंटे में धान की कटाई कर सकती है. वहीं, खेत की परिस्थितियों और स्थानीय बीघा के माप के अनुसार, एक दिन में करीब 10 बीघा तक कटाई संभव है. मशीन के इस्तेमाल से किसानों को कम समय में फसल कटवाने में मदद मिलती है और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है.
एक घंटे में 500 से 600 रुपये की कमाई
सूर्यदेव विश्वकर्मा ने आगे बताया कि वह अपनी रीपर मशीन से धान की कटाई करने के लिए प्रति घंटे 500 से 600 रुपये तक लेते हैं. सामान्य दिनों में मशीन चार से पांच घंटे चलती है. इस हिसाब से प्रतिदिन 2,000 से 3,000 रुपये तक की सकल कमाई हो सकती है. हालांकि, इसमें से डीजल, रखरखाव और अन्य खर्च घटाने के बाद वास्तविक मुनाफा तय होता है. मशीन में प्रति घंटे लगभग 1 से 1.5 लीटर डीजल की खपत होती है. इससे उन्हें मशीन चलाने के खर्च का आकलन करने और सेवा की दर तय करने में मदद मिलती है.
यूट्यूब से मिला आइडिया, गांव में बढ़ी आधुनिक खेती की उम्मीद
सूर्यदेव विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें रीपर मशीन खरीदने का विचार यूट्यूब से जानकारी मिला था. वीडियो देखने के बाद उन्होंने मशीन की उपयोगिता को समझा और राजस्थान से इसे मंगवाया. अब वह भविष्य में अन्य आधुनिक कृषि मशीनें भी गांव में उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं. इससे उनकी आय बढ़ाने के साथ आसपास के किसानों को भी खेती के आधुनिक साधनों का लाभ मिल सकेगा.
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
सलखनी गांव के सूर्यदेव विश्वकर्मा की यह पहल बताती है कि इंटरनेट से मिली जानकारी और सही निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं. कृषि मशीनों के माध्यम से किसान खेती के साथ-साथ दूसरों के खेतों में सेवाएं देकर भी कमाई कर सकते हैं. धान की कटाई के व्यस्त मौसम में रीपर मशीन किसानों का समय और मेहनत बचाने का उपयोगी विकल्प बन सकती है.
About the Author
प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…