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Palamu Satbahani Mandir Story: पलामू में अमानत नदी के बीच स्थित सतबहिनी मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य से जुड़ी एक अद्भुत जगह है. चार गांवों ने मिलकर इस जगह का निर्माण पूरा किया और साल 1994 से यह आस्था का केंद्र है. इसके नाम के पीछे की कहानी भी खास है.
पलामू. जहां आस्था होती है, वहां सिर्फ विश्वास ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी कहानियां और मान्यताएं भी सांस लेती हैं. इन्हीं आस्था और मान्यता के साथ सदियों पुरानी कहानी को समेटे झारखंड के पलामू जिले में स्थित सतबहिनी मंदिर भी एक ऐसी ही आस्था, रहस्य और इतिहास से जुड़ी अद्भुत जगह है. जहां गर्मी के दिनों में घूमने फिरने भी आप आ सकते हैं. दअसल, जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 30 किलोमीटर दूर अमानत नदी के बीचों-बीच बसा यह मंदिर प्रकृति की गोद में छिपी हुई एक अनमोल धरोहर है.
यहां पूजा-अर्चना के साथ-शादी विवाह के लिए भी लोग पहुंचते हैं. यहां सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश से भी लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं. रामनवमी और मकर संक्रांति के मौके पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जो इस स्थल को और भी जीवंत बना देता है.
कैसे पड़ा सतबहिनी नाम
स्थानीय निवासी उत्कर्ष शुक्ला ने लोकल18 को बताया कि इस स्थान की कहानी राजाओं के कालखंड से जुड़ी है. कहा जाता है कि मानगढ़ के राजा और रक्सेल राजा के बीच अक्सर युद्ध होते रहते थे. एक बार जब मानगढ़ राजा ने रक्सेल के किले को चारों ओर से घेर लिया, तब रक्सेल राजा की सात बेटियों ने अपनी रक्षा के लिए किले के गुप्त रास्ते से निकलकर इस स्थान पर स्थित जलकुंड में कूदकर आत्मबलिदान दे दिया. तभी से इस जगह को ‘सतबहिनी’ के नाम से जाना जाने लगा.
इस साल से हो रही है नियमित पूजा
स्थानीय लोगों ने कहा कि नीलांबर-पीतांबर प्रखंड के ओरिया गांव के पास अमानत नदी के बीचों बीच स्थित इस मंदिर का निर्माण भी अपने आप में एक मिसाल है. साल 1993 में चार गांव – ओरिया, देल्हा, खैरात और असनौर – के लोगों ने मिलकर इसका निर्माण शुरू किया, जो 1994 में पूरा हुआ. इसके बाद से यहां नियमित पूजा और मेलों की परंपरा शुरू हो गई. ये भी जान लें कि मंदिर की प्रचलित कहानियां, स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वर्णन किसी ग्रंथ आदि में नहीं दिया गया है.
पास ही है तीन नदियों का संगम
इस स्थल की एक और खासियत है यहां स्थित गुफा, जहां सतबहिनी माता की पूजा की जाती है. साथ ही यहां आस पास तीन नदियों – अमानत, टेरहवा और सुखरो – का संगम भी होता है, जो इसे और पवित्र बना देता है. मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और प्रवेश द्वार पर महावीर जी की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं का स्वागत करती है. गर्मियों के दिनों में स्थानीय लोग सुकून के पल बिताने भी यहां पहुंचते हैं. वहीं शादी विवाह के सीजन में लोग यहां शादी भी करते हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें