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11-13वीं सिविल सेवा परीक्षा-2023 को लेकर भी विवादों में जेपीएससी झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा भर्ती परीक्षा में धांधली को लेकर बवाल मचा हुआ है। सीआईडी इसकी जांच कर रही है। आयोग की उप परीक्षा नियंत्रक और परीक्षा एजेंसी के निदेशक सहित 10 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। चेयरमैन से पूछताछ चल रही है। इसी बीच 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इस परीक्षा में हरियाणा के पलवल निवासी एक ऐसे अधिकारी का झारखंड प्रशासनिक सेवा के लिए चयन हुआ है, जो सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड रहा है। राज्य सिविल सेवा परीक्षा-2023 की अंतिम चयन सूची में उसका रोल नंबर 2315140 दर्ज है। अभी वह ट्रेनिंग पर है। वर्ष 2021 में दिल्ली-एनसीआर में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ था। तब जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि एक संगठित गिरोह विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में असली अभ्यर्थियों की जगह प्रशिक्षित सॉल्वर बैठाने, फर्जी पहचान पत्र तैयार करने और तकनीकी माध्यम से परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने का काम करता था। इस दौरान दिल्ली के निलंबित आयकर निरीक्षक रवि कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आया था। जांच एजेंसियों ने उसे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया था। अब वही रवि झारखंड में प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बन गया है। 2021 में नोएडा थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
एफआईआर में रवि पर थे ये आरोप
नोएडा के सेक्टर-58 थाना में दर्ज एफआईआर के अनुसार रवि कुमार पर प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि असली अभ्यर्थी की जगह प्रशिक्षित व्यक्ति को भर्ती परीक्षा में बैठाता है। फर्जी आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करता है। बायोमेट्रिक और पहचान सत्यापन में हेरफेर कर विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं को निशाना बनाता है। संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। अब राज्य सिविल सेवा-2023 के अंतिम परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों की सूची में रवि का नाम आते ही जांच की मांग तेज हो गई है। वेरिफिकेशन सिस्टम पर सवाल मामला सामने आने के बाद अब जेपीएससी की चयन प्रक्रिया के दौरान सत्यापन पर सवाल उठने लगे हैं। वेरिफिकेशन में इसका पता क्यों नहीं चला कि वह सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड है और 25 हजार रुपए का इनामी है, जबकि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। ऐसे में प्रशासनिक सेवा जैसी संवेदनशील भर्ती में सत्यापन प्रणाली कितनी प्रभावी है। आयोग के एक पूर्व सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अंतिम नियुक्ति से पहले चरित्र सत्यापन और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया होती है। अगर किसी अभ्यर्थी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं तो संबंधित प्राधिकारी तथ्यों की समीक्षा कर निर्णय लेते हैं। इधर, पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष से तीसरी बार 8 घंटे पूछताछ, 3 अगस्त को फिर बुलाया जेपीएससी के कुछ सदस्य की भी भूमिका संदिग्ध, समन जल्द झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की जांच में सीआईडी को अब आयोग के कुछ सदस्यों की संदिग्ध भूमिका के इनपुट मिले हैं। एजेंसी इनकी सत्यता की जांच में जुट गई है। साक्ष्य मिलने पर जल्द उन्हें भी पूछताछ के लिए समन जारी कर सकती है। इसी बीच, शुक्रवार को सीआईडी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते से लगातार तीसरी बार करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ पूरी नहीं होने पर उन्हें सोमवार, 3 अगस्त को फिर सीआईडी मुख्यालय बुलाया गया है।
शुक्रवार को सीआईडी मुख्यालय में ख्यांग्ते का सामना रिमांड पर लिए गए पांचों मुख्य आरोपियों से कराया गया। ख्यांग्ते से पूछताछ के दौरान कड़ी सुरक्षा, रिमांड पूरी, पांच आरोपी जेल भेजे गए
पांच मुख्य आरोपियों की सात दिन की रिमांड शुक्रवार को पूरी हो गई। पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीआईडी ने सभी को वापस जेल भेज दिया। अब जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों का मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और अन्य संदिग्धों की भूमिका भी तय की जाएगी। जेल भेजे गए आरोपियों में पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह, मार्केटिंग ऑफिसर मनोज तिवारी, कर्मी मो. उस्मान व मो. एबाद शामिल हैं। आगे क्या… सदस्यों और पूर्व अध्यक्ष के बयानों का मिलान होगा
सीआईडी अब उन सदस्यों की भूमिका से जुड़े इनपुट्स का सत्यापन कर रही है, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किया जाएगा। इसके बाद उनके बयानों का मिलान पूर्व अध्यक्ष और अन्य आरोपियों के बयान से किया जाएगा, ताकि सभी की भूमिका स्पष्ट हो सके।
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