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नौकरी छोड़ी, यूट्यूब से मिला आइडिया, 1 लाख की लागत से शुरू...


देवघर. आज के समय में गांव के ज्यादातर युवा चाहते हैं कि उन्हें अपने ही गांव में कोई ऐसा काम मिल जाए, जिससे शहरों की भागदौड़ से बचते हुए परिवार के साथ रहकर अच्छी कमाई की जा सके. लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि आखिर ऐसा कौन-सा कारोबार शुरू किया जाए, जिसमें बहुत ज्यादा पूंजी भी न लगे और कमाई भी लगातार होती रहे. अगर आपके मन में भी ऐसा सवाल आता है, तो देवघर के एक युवक की यह कहानी आपके लिए प्रेरणा बन सकती है.

इस युवक ने किसी बड़ी फैक्ट्री या कंपनी का सहारा नहीं लिया, बल्कि एक छोटी-सी मशीन खरीदकर अपने घर से ही कारोबार शुरू किया. आज यही कारोबार पूरे परिवार की आय का जरिया बन गया है और आसपास के गांवों के लोग भी उनसे इस काम की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं.

यूट्यूब देखकर सीखा यह बिजनेस आइडिया
देवघर प्रखंड के राकुडीह गांव के रहने वाले 29 वर्षीय मृत्युंजय राउत ने दो साल पहले अपने भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया. नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटकने के बजाय उन्होंने खुद का रोजगार शुरू करने की ठानी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्हें पत्तल और दोना बनाने का आइडिया किसी ट्रेनिंग सेंटर या सरकारी योजना से नहीं, बल्कि यूट्यूब देखकर मिला.

उन्होंने इंटरनेट पर इस कारोबार के बारे में जानकारी जुटाई, मशीन की कीमत, कच्चे माल और बाजार की मांग को समझा और फिर बिना ज्यादा देर किए इस काम में उतर गए. उनका मानना था कि अगर मेहनत और लगन से काम किया जाए, तो गांव में रहकर भी अच्छी कमाई की जा सकती है.

50 हजार में खरीदकर लाए मशीन
मृत्युंजय बताते हैं कि उन्होंने झारखंड के धनबाद जिले से करीब 50 हजार रुपये की कीमत वाली पत्तल-दोना बनाने की मशीन खरीदी. इसके बाद करीब 50 हजार रुपये कच्चे माल पर खर्च किए. यानी लगभग एक लाख रुपये की शुरुआती लागत से उन्होंने अपने घर में ही छोटा-सा यूनिट तैयार कर लिया. शुरुआत में मशीन चलाना सीखने और बाजार बनाने में थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उनका काम चल निकला. अब पिछले दो वर्षों से वह लगातार पत्तल और दोना तैयार कर रहे हैं और इसी कारोबार से परिवार का खर्च भी चला रहे हैं.

महीने की 40 से 50 हजार तक की कमाई हो जाती है
उन्होंने बताया कि उनके यहां तैयार होने वाले पत्तल और दोना की अच्छी मांग रहती है. वह करीब 50 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से बाजार में बेचते हैं. महीने में लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. आसपास के दुकानदार, मिठाई की दुकानें, होटल, चाय-नाश्ते के ठेले, पूजा-पाठ, भंडारा और शादी-विवाह जैसे आयोजनों में इनकी लगातार जरूरत रहती है. यही कारण है कि तैयार माल ज्यादा दिनों तक घर में नहीं रुकता और नियमित बिक्री होती रहती है. जैसे-जैसे ग्राहक बढ़ते गए, वैसे-वैसे उनकी कमाई भी बढ़ती चली गई.

शादी-विवाह के समय सबसे ज्यादा होती है कमाई
मृत्युंजय का कहना है कि इस कारोबार में सबसे ज्यादा कमाई शादी-विवाह के सीजन में होती है. लग्न शुरू होते ही पत्तल और दोना की मांग कई गुना बढ़ जाती है. कई ग्राहक पहले से ऑर्डर देकर माल बुक कर लेते हैं. ऐसे समय में मशीन को लगातार चलाना पड़ता है, ताकि समय पर ऑर्डर पूरे किए जा सकें. मेहनत जरूर ज्यादा होती है, लेकिन उसी के साथ आमदनी भी बढ़ जाती है. उनका कहना है कि अगर कोई इस कारोबार को पूरी मेहनत और सही तरीके से करे, तो गांव में रहकर भी अच्छी कमाई करना बिल्कुल संभव है.

मां का मिलता है साथ
इस कारोबार की एक और खास बात यह है कि इसमें पूरा परिवार साथ मिलकर काम करता है. मृत्युंजय की 62 वर्षीय मां भी इस काम में बराबर की भागीदार हैं. वह घर में बैठकर पत्तल और दोना तैयार करने में मदद करती हैं, जबकि मृत्युंजय तैयार माल को बाजार तक पहुंचाकर बेचते हैं. उनकी मां कहती हैं कि पहले घर पर खाली समय निकल जाता था, लेकिन अब उसी समय का इस्तेमाल काम में होता है. इससे घर बैठे आय भी हो रही है और परिवार को आर्थिक मजबूती भी मिल रही है. मां-बेटे की यह जोड़ी आज गांव के कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

इस बिजनेस से गांव में रहकर ही कर सकते हैं कमाई
मृत्युंजय का मानना है कि आज के समय में गांव के युवाओं को सिर्फ नौकरी के पीछे भागने के बजाय छोटे-छोटे कारोबार की तरफ भी ध्यान देना चाहिए. अगर सही जानकारी, थोड़ी पूंजी और मेहनत करने का जज्बा हो, तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक कमाई की जा सकती है. पत्तल और दोना बनाने का कारोबार ऐसा ही एक उदाहरण है, जिसने एक साधारण परिवार की जिंदगी बदल दी. यही वजह है कि अब आसपास के कई युवा भी उनसे मशीन, लागत और इस कारोबार की बारीकियां जानने पहुंच रहे हैं. गांव में शुरू हुआ यह छोटा-सा स्टार्टअप आज दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार की नई उम्मीद बनता दिखाई दे रहा है.



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