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न कोई बड़ा दुश्मन, न कोई युद्ध… बांग्लादेश की डिफेंस शॉपिंग लिस्ट...


भारत के पूर्वी पड़ोसी बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से सैन्य आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज हो गई है. चीन, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे देशों के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग, नए हथियारों की खरीद और भारत के रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के आसपास सैन्य ढांचे के विस्तार की योजनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चर्चाएं छेड़ दी हैं. हालांकि, किसी भी संप्रभु देश को अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार हथियार खरीदने और सेना का आधुनिकीकरण करने का पूरा अधिकार है.

बांग्लादेश लंबे समय से अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन हाल के महीनों में उसकी तैयारियों की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी तेज दिखाई दे रही है. ढाका एक साथ सेना, नौसेना, वायुसेना, बॉर्डर गार्ड और कोस्ट गार्ड के लिए नए हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक, हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और युद्धपोत खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके साथ ही सरकार घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने, ड्रोन निर्माण संयंत्र स्थापित करने और नए सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दे रही है.

दिलचस्प बात यह है कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब बांग्लादेश किसी बड़े युद्ध में शामिल नहीं है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ढाका इतनी तेजी से अपनी सैन्य क्षमता क्यों बढ़ा रहा है? पिछले कुछ वर्षों और खासकर हाल के महीनों में उसने कौन-कौन से रक्षा सौदे और फैसले किए हैं, आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

सेना को मिल रहे नए हथियार और टैंक
बांग्लादेश सेना अपने जमीनी युद्धक क्षमता को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है. फरवरी 2026 में सेना को चीन से VT-5 (टाइप-15) लाइट टैंकों की नई खेप मिली. इससे पहले भी 2022 से ऐसे 44 टैंक सेना को मिल चुके हैं. इन टैंकों को अधिक गतिशील और तेज ऑपरेशन के लिए अहम माना जाता है.

तोपखाने को भी आधुनिक बनाया जा रहा है. सेना के पास मौजूद सर्बिया निर्मित 155 मिमी NORA B-52K1 सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर को अब नए NORA-B52NG मानक में अपग्रेड किया जाएगा. इस अपग्रेड के बाद इनकी फायरिंग क्षमता, ऑटोमेशन और लंबी दूरी तक हमला करने की ताकत बढ़ जाएगी.

इसके अलावा सेना आधुनिक गोला-बारूद भी खरीद रही है. तुर्किये की Roketsan कंपनी से TRG-230 और TRG-300 गाइडेड रॉकेट खरीदे गए हैं, जिन्हें पोलैंड के RAK लॉन्चर सिस्टम पर इस्तेमाल किया जाएगा.

अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी होंगे शामिल
सेना केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि हवाई क्षमता भी बढ़ा रही है. 31 दिसंबर 2025 को चार refurbished Sikorsky UH-60L Black Hawk हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया. ये हेलीकॉप्टर सैनिकों के परिवहन, मेडिकल इवैक्यूएशन और अन्य अभियानों में इस्तेमाल होंगे.

इसके साथ ही Beechcraft King Air 360ER विमान खरीदने की भी योजना है, जिन्हें हल्के परिवहन और मेडिकल मिशनों में लगाया जाएगा. दक्षिण कोरिया की KAI कंपनी के LAH-1 अटैक हेलीकॉप्टर और KUH-1 Surion यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों में भी रुचि दिखाई गई है. इनका उद्देश्य पुराने रूसी हेलीकॉप्टरों की जगह नए प्लेटफॉर्म लाना है.

नौसेना भी तेजी से बढ़ा रही ताकत
बांग्लादेश नौसेना भी अपने बेड़े का विस्तार कर रही है. दिसंबर 2025 में चार Large Patrol Craft (LPC) खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया. इन जहाजों का इस्तेमाल समुद्री गश्त और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी में किया जाएगा.

फरवरी 2026 में ब्रिटेन ने अपनी सेवा से हटाए गए Echo-class सर्वे जहाज HMS Enterprise को बांग्लादेश नौसेना को सौंप दिया. यह जहाज समुद्री सर्वेक्षण, हाइड्रोग्राफी, समुद्री अनुसंधान और खोज एवं बचाव अभियानों में मदद करेगा.

सरकार भविष्य में आधुनिक फ्रिगेट, कॉर्वेट, ऑफशोर पेट्रोल वेसल, पनडुब्बियों और नई नौसैनिक बेस बनाने की भी योजना पर काम कर रही है. घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों पर भी जोर दिया जा रहा है.

वायुसेना के लिए लड़ाकू विमानों की लंबी सूची
बांग्लादेश वायुसेना अपने पुराने लड़ाकू विमानों को बदलने की दिशा में बड़े फैसले ले रही है. दिसंबर 2025 में इटली की Leonardo कंपनी के साथ Eurofighter Typhoon मल्टीरोल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए Letter of Intent (LOI) पर हस्ताक्षर किए गए. माना जा रहा है कि भविष्य में लगभग 10 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते हैं, हालांकि अंतिम समझौता अभी बाकी है.

इसी दौरान चीन से लगभग 20 J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की योजना भी सामने आई. बाद में कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि बांग्लादेश दो दर्जन J-10C लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस पर जुलाई के अंत तक समझौता हो सकता है.

इसके अलावा पाकिस्तान के JF-17 Thunder लड़ाकू विमान में भी बांग्लादेश ने रुचि दिखाई है. जनवरी 2026 में दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की बैठक के दौरान इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई. पाकिस्तान ने Super Mushshak ट्रेनर विमान की आपूर्ति तेज करने पर भी सहमति जताई.

तुर्किये से अटैक हेलीकॉप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम
जनवरी 2026 में यह भी पुष्टि हुई कि बांग्लादेश ने तुर्किये से छह TAI T-129 ATAK अटैक हेलीकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है. इनकी डिलीवरी 2027 तक होने की उम्मीद है.

इसी रक्षा पैकेज में Hisar-O मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली भी शामिल है. इसके जरिए बांग्लादेश अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करना चाहता है ताकि विमान और ड्रोन जैसे खतरों से निपटा जा सके.

ड्रोन पर खास फोकस
बांग्लादेश अब केवल ड्रोन खरीद ही नहीं रहा, बल्कि उन्हें देश में बनाने की तैयारी भी कर रहा है. जनवरी 2026 में चीन की CETC International के साथ समझौता किया गया, जिसके तहत देश में ड्रोन निर्माण और असेंबली प्लांट स्थापित किया जाएगा. इस समझौते के तहत CETC XY-I निगरानी ड्रोन की तकनीक भी बांग्लादेश को दी जाएगी.

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 12 निगरानी ड्रोन और उनके कंट्रोल स्टेशन उपलब्ध कराए हैं, जिनका इस्तेमाल कोस्ट गार्ड समुद्री निगरानी में कर रहा है.

भारत के करीब बन रही ड्रोन फैक्ट्री
सरकार ने बोगुरा में तुर्किये के साथ मिलकर सैन्य ड्रोन निर्माण संयंत्र स्थापित करने का फैसला किया है. यह फैक्ट्री बोगुरा एयरपोर्ट के पास बनाई जाएगी. सरकार यहां नया एयरबेस भी विकसित कर रही है. इसके साथ ही चीन की मदद से ऐतिहासिक लालमोनिरहाट एयरबेस को दोबारा विकसित किया जा रहा है. ठाकुरगांव एयरपोर्ट का भी विस्तार किया जा रहा है.

इन सभी परियोजनाओं का स्थान भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के आसपास माना जाता है. इसी वजह से इन गतिविधियों पर भारत भी नजर बनाए हुए है.

बॉर्डर गार्ड और कोस्ट गार्ड भी हो रहे मजबूत
सरकार ने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के लिए मोटरसाइकिल खरीदने की मंजूरी दी है ताकि सीमावर्ती और शहरी इलाकों में तेजी से गश्त की जा सके.

वहीं कोस्ट गार्ड के लिए दो हाई-स्पीड पेट्रोल बोट खरीदी जा रही हैं. बुलेटप्रूफ और तेज गति वाली ये नौकाएं तस्करी रोकने, तटीय सुरक्षा और खोज एवं बचाव अभियानों में इस्तेमाल होंगी.

अगले 10 वर्षों में 86,000 करोड़ टका का बड़ा प्लान
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संसद में जानकारी दी कि सरकार अगले दस वर्षों में लगभग 86,000 करोड़ टका खर्च कर सेना के व्यापक आधुनिकीकरण की योजना पर काम कर रही है. इस योजना के तहत नए टैंक, बख्तरबंद वाहन, आधुनिक आर्टिलरी, रॉकेट सिस्टम, एंटी-टैंक हथियार, छोटी और मध्यम दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली, UAV, काउंटर-UAV सिस्टम और आधुनिक निगरानी तकनीक शामिल की जाएगी.

सरकार लंबी अवधि के युद्ध के लिए आर्टिलरी गोला-बारूद, MLRS रॉकेट, टैंक गोला-बारूद और एंटी-टैंक मिसाइलों का रणनीतिक भंडार भी तैयार करना चाहती है.

‘Made in Bangladesh’ डिफेंस इंडस्ट्री पर जोर
बांग्लादेश अब केवल विदेशी हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता. सरकार राष्ट्रीय रक्षा औद्योगिक नीति तैयार कर रही है. इसके तहत Defence Industrial Zones स्थापित किए जाएंगे और तकनीक हस्तांतरण के जरिए देश में सैन्य उपकरणों का निर्माण बढ़ाया जाएगा.

योजना के अनुसार देश में आधुनिक असॉल्ट राइफल, एंटी-टैंक मिसाइल, फ्यूज, प्राइमर, बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट जैसे सैन्य उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा. साथ ही विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

आखिर तस्वीर क्या कहती है?
पिछले कुछ महीनों में लिए गए फैसलों से साफ है कि बांग्लादेश अपनी सेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों का एक साथ व्यापक आधुनिकीकरण कर रहा है। लड़ाकू विमान, टैंक, हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, युद्धपोत, एयर डिफेंस, नए एयरबेस, सैन्य बुनियादी ढांचे और घरेलू रक्षा उत्पादन जैसे लगभग हर क्षेत्र में एक साथ काम चल रहा है. इसके साथ ही चीन, तुर्किये, पाकिस्तान, इटली, ब्रिटेन, अमेरिका, सर्बिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाकर ढाका बहु-स्रोत (Multi-source) रक्षा खरीद की रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है.

इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुछ सैन्य परियोजनाएं भारत के रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के आसपास विकसित की जा रही हैं. हालांकि, किसी भी संप्रभु देश को अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार सैन्य क्षमताएं बढ़ाने का अधिकार है, लेकिन इन गतिविधियों का क्षेत्रीय रणनीतिक महत्व भी है. ऐसे में भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर नजर रखने वाले देशों के लिए बांग्लादेश की इन रक्षा तैयारियों और बदलती सैन्य रणनीति पर करीबी नजर बनाए रखना स्वाभाविक माना जा रहा है.



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