ओडिशा के भद्रक रेलवे स्टेशन पर साल 2023 में मिला एक 8 साल का बच्चा, जिसकी न कोई पहचान थी और न ही कोई अपना, अब एक नए नाम और नए परिवार के साथ जिंदगी की नई शुरुआत करेगा. तीन साल के लंबे इंतजार, तलाश और कानूनी प्रक्रिया के बाद इस बच्चे को गोवा के एक दंपत्ति ने गोद ले लिया है. अब शुभम की पहचान बदलकर ‘साईं विजयनाथ’ हो गई है.
यह कहानी एक ऐसे बच्चे की है, जिसने बिना किसी सहारे के सफर शुरू किया था, लेकिन अब उसे अपना घर, माता-पिता और एक नई जिंदगी मिल गई है.
रेलवे स्टेशन पर मिला था अकेला
जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों के मुताबिक, साल 2023 में भद्रक रेलवे स्टेशन पर बच्चे को लावारिस हालत में पाया गया था. उस वक्त वह एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के पास बैठा था. पूछताछ के दौरान न बच्चा और न ही वह व्यक्ति उसके परिवार या घर के बारे में कोई जानकारी दे सके.
इसके बाद बाल कल्याण समिति (CWC) ने बच्चे को ‘शुभम’ नाम दिया और उसे कांजियापाल स्थित महापुरुष आश्रम में भेज दिया गया, जहां पहले से कई अनाथ बच्चे रह रहे थे.
परिवार की तलाश में किए गए हर संभव प्रयास
अधिकारियों ने बच्चे के असली माता-पिता और परिवार को खोजने के लिए लगातार प्रयास किए. जिला प्रशासन की ओर से अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए बच्चे की जानकारी साझा की गई, लेकिन लंबे समय तक कोई भी व्यक्ति उसकी पहचान या परिवार से जुड़ी जानकारी लेकर सामने नहीं आया.
जब परिवार की तलाश की सभी कोशिशें नाकाम रहीं, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया शुरू की गई.
गोवा के दंपत्ति बने नए माता-पिता
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों के तहत कई स्तरों पर जांच के बाद गोवा के एम.के. विजयनाथ और गीता विजयनाथ को बच्चे के लिए उपयुक्त माता-पिता चुना गया.
गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले शुभम ने करीब 15 दिन नए माता-पिता के साथ बिताए, ताकि दोनों एक-दूसरे को समझ सकें. इसके बाद सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं.
बदली पहचान, शुरू हुई नई जिंदगी
अंतिम मंजूरी के लिए बच्चे और उसके नए माता-पिता को भद्रक के जिलाधिकारी दिलीप राउत्रे के सामने पेश किया गया. मंजूरी मिलने के बाद शुभम को नया परिवार मिल गया.
गोवा के दंपत्ति ने उसका नाम बदलकर ‘साईं विजयनाथ’ रख दिया. कभी रेलवे स्टेशन पर अकेला मिला यह बच्चा अब अपने नए माता-पिता के साथ सपनों और उम्मीदों से भरी जिंदगी की शुरुआत करेगा.