भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

पलमा-गुमला हाईवे पर अनियंत्रित बालू ढुलाई, हादसों का खतरा बढ़ा




रेत गिरते रहने से सड़क पर बढ़ी फिसलन, बिना तिरपाल वाहनों पर कार्रवाई की मांग भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन पलमा-गुमला एनएच-23 पर अनियंत्रित बालू परिवहन अब सड़क सुरक्षा और परियोजना दोनों के लिए खतरा बन गया है। बिना तिरपाल दौड़ रहे बालू लदे वाहनों से हाईवे पर लगातार रेत गिर रही है, जिससे सड़क फिसलन भरी हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसे गंभीर मानते हुए रांची और गुमला जिला प्रशासन को पत्र भेज अलर्ट जारी कर तत्काल सख्ती की मांग की है। एनएचएआई के उपमहाप्रबंधक सह परियोजना निदेशक कुमार गौतम ने कहा है कि बड़ी संख्या में बालू लदे वाहन दिन-रात हाईवे से गुजर रहे हैं। सड़क और किनारों पर लगातार रेत गिरने से दुर्घटना की आशंका कई गुणा बढ़ गई है। एनएचएआई ने पत्र की प्रतिलिपि दोनों जिलों के एसपी और संबंधित अधिकारियों को भी भेजी है। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो गंभीर सड़क हादसे हो सकते हैं। ओवरलोडिंग वाहनों की जांच तेज करे प्रशासन
एनएचएआई ने जिला प्रशासन से संबद्ध अधिकारियों द्वारा तत्काल संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाने, बिना तिरपाल बालू ढोने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने और ओवरलोडिंग वाहनों की जांच के लिए नियमित अभियान चलाने को कहा है। इसके साथ संवेदनशील जगहों पर प्रवर्तन दल तैनात करने व बालू घाट संचालकों को सख्त निर्देश देने की मांग एनएचएआई की ओर से की गई है। एनएचएआई के मुताबिक सड़क पर जमा रेत से हाईवे की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। लगातार रेत और ओवरलोड वाहनों के दबाव से सड़क को नुकसान पहुंच रहा है। इससे भविष्य में मरम्मत और रखरखाव का खर्च भी बढ़ेगा। एनएचएआई ने मानसून को लेकर भी चिंता जताई है। बारिश होने पर सड़क पर फैली बालू ग्रीस जैसी फिसलन पैदा कर देती है। इससे बाइक और साइकिल सवारों के फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top