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पहले करती थीं चुगली, अब कमा रहीं ₹25000 महीना! मड़वा की नर्सरी...


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Ranchi Women Millet Nursery Business: रांची के मुरकुनी गांव की महिलाएं मड़वा बीज नर्सरी से संगठित होकर काम कर रही हैं. वह गोमूत्र तकनीक से पौधे तैयार कर झारखंड समेत कई राज्यों में बेचकर महीने में 20-25 हजार कमा रही हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची से सटे मुरकुनी गांव की महिलाएं बताती हैं कि पहले यहां शाम में बैठकर 8-10 महिलाएं एक दूसरे की चुगली किया करती थी, लेकिन फिर किसी ने दिमाग दिया कि हमें मड़वा के बीज की नर्सरी का बिजनेस करना चाहिए और यह आइडिया हमें पसंद आया. अब आलम यह है कि मंडली बैठाते हैं तो एक ही साथ बीज से पौधा तैयार करने का काम सभी करती हैं. इससे सभी को मुनाफा भी हो रहा है.

हम सभी की जमीन एक ही जगह है. पहले जहां खाली बैठकर चुगली करते थे. आज महीने की हर औरतें 20-25 हजार रुपये कमा रही हैं और कुल मिलाकर लाखों की इनकम हो रही है. सबसे खास बात ये है कि यह पौधे सिर्फ झारखंड के अलग-अलग जिलों में ही नहीं जाते हैं. बल्कि, राजस्थान छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश जैसे राज्य में भी जाते हैं. यहां इसे व्यापारी आकर ले जाते हैं.

खास तरीके से तैयार करते हैं पौधें

वहीं, सरिता बताती हैं कि हम लोग खास तरीके से इस बीज को पहले तैयार करते हैं. इसके लिए सबसे पहले मड़वा का बीज लिया जाता है, उसमें गोमूत्र मिलाया जाता है. गोमूत्र मिलाने के बाद इसको 2 घंटा सुखाया जाता है, फिर इसमें बालू मिलाया जाता है, बालू मिलाने के बाद फिर थोड़ा-थोड़ा लेकर क्यारी में डाला जाता है और क्यारी में बहुत ज्यादा नहीं डाला जाता है. एकदम थोड़ा-थोड़ा करके डाला जाता है. फिर 30 दिनों में ही पौधा तैयार हो जाता है.

बीज में गोमूत्र मिलाकर सूखाने से क्या होता है कि इसकी जड़ें काफी मजबूत हो जाती हैं और काफी मोटा होता है. ऐसे में जब यह पौधा बड़ा होगा तो इसमें जो मडवा होगा, इसकी क्वांटिटी अन्य के मुकाबले काफी अधिक होगी. इस तरीके से सारी महिलाएं यह मिलकर सारा काम करती हैं. कुछ महिलाएं जाकर बोती हैं और कुछ महिलाएं यहां पर बीज तैयार करती हैं, तो कुछ खरपतवार हटाती हैं. ऐसे में सब मिलकर काम करती हैं.

आज हो रही है अच्छी कमाई

आज सभी महिलाओं की अच्छी कमाई हो रही है. पहले बैठकर इधर-उधर की बातें होती थी. कोई काम की बात नहीं होती थी, लेकिन आज सभी मिलती हैं तो सीधा काम पर लग जाती हैं और खास बात है कि सब मिलकर काम करती हैं. जो अन्य महिलाएं हैं, वह भी देखकर हमें सीख रही हैं. वह भी आकर कहती हैं कि क्या हम लोग इस तरह की कोई चीज कर सकते हैं. आज हमारे पास स्मार्टफोन से लेकर अपनी स्कूटी और कई सारी चीजें हैं.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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