जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में छेड़खानी का विरोध करने पर करणी सेना के सरायकेला जिला युवा अध्यक्ष हिमांशु सिंह की नृशंस हत्या के बाद पूरे शहर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है. पुलिस की मौजूदगी में पेट्रोलिंग गाड़ी से खींचकर की गई इस वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आधी रात को बड़ा फैसला लेते हुए दो जिलों के पुलिस कप्तानों को हटा दिया है. वहीं शहर के प्रमुख इलाकों में अनिश्चितकालीन निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.
क्या है पूरा मामला?
शनिवार रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित ‘डबल डाउन बार’ में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा महिलाओं से कथित तौर पर छेड़खानी की जा रही थी. मौके पर मौजूद करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह और उनके एक साथी ने इसका कड़ा विरोध किया. विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद और कहासुनी काफी बढ़ गई.
सूचना मिलने पर बिष्टुपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षा के लिहाज से हिमांशु और उनके साथी को अपनी पेट्रोलिंग गाड़ी में बैठा लिया. आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बेखौफ हमलावरों ने दोनों युवकों को पुलिस वाहन से जबरन बाहर खींच लिया और उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया.
इस जानलेवा हमले में हिमांशु सिंह और उनके मित्र बुरी तरह लहूलुहान हो गए. दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार शाम इलाज के दौरान हिमांशु सिंह ने दम तोड़ दिया. वहीं, दूसरे घायल युवक की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और टाटा मेन हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है. पुलिस ने इस मामले में बार मालिक समेत 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
आधी रात को प्रशासनिक फेरबदल और कार्रवाई
हिमांशु की मौत की खबर फैलते ही पूरे शहर में आक्रोश फैल गया. पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया. सीएम ने पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय और उनकी पत्नी व सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता तथा आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का निर्णय मैंने लिया है.
उन्होंने आगे लिखा, चाईबासा के आयुक्त एवं एडीजी को क्षेत्र में लगातार कैंप कर स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, डीआईजी जमशेदपुर में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे. जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी. किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
तड़के हुआ पोस्टमार्टम, परिजनों का शव लेने से इनकार
मंगलवार देर रात करीब 2:30 बजे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अफसरों की टीम हिमांशु के शव को टीएमएच से लेकर एमजीएम अस्पताल पहुंची. जहां तड़के 3 बजे डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया. हालांकि, एसडीएम के बार-बार बुलाने पर भी परिवार का कोई सदस्य वहां नहीं पहुंचा. हिमांशु का शव अब भी एमजीएम के पोस्टमार्टम हाउस में रखा हुआ है.
इससे पहले निवर्तमान एसएसपी पीयूष पांडेय ने रात 10 बजे आदित्यपुर स्थित हिमांशु के घर जाकर परिजनों से अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया था, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे. बुधवार को भी विधायक सरयू राय, जमशेदपुर सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और लिखित आश्वासन की मांग कर रहे परिजनों को समझाने का प्रयास किया.
हत्यारों के एनकाउंटर की मांग
शोक में डूबे हिमांशु के पिता अरविंद सिंह ने अपने इकलौते बेटे के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उनका और हिमांशु का रिश्ता दोस्तों जैसा था. उन्होंने कहा, “मेरा बेटा सामाजिक कार्यकर्ता था और समाज के लिए जीता था. उसकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी. मैं चाहता हूं कि हत्यारों का एनकाउंटर हो ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न करे.”
परिजनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि जब तक मुख्य आरोपियों का एनकाउंटर नहीं होता और हिमांशु की पत्नी ऋचा सिंह को सरकारी नौकरी देने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. परिजनों ने मांग पूरी न होने पर बुधवार शाम 5 बजे के बाद पूरे शहर को जाम करने की चेतावनी भी दी है.
इस बीच जेएमएम नेताओं की मध्यस्थता से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पीड़ित पिता से फोन पर बात की. सीएम ने आश्वासन दिया कि अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.
शहर के 6 थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू
डबल डाउन बार कांड के बाद फैले तनाव और धरने-प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए धालभूम के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है.
- प्रभावित क्षेत्र: साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, एमजीएम और मानगो थाना क्षेत्र.
- प्रमुख प्रतिबंध: इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, घेराव और पुतला दहन पर पूरी तरह रोक रहेगी.
- अस्त्र-शस्त्र पर पाबंदी: सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, डंडा, तलवार, भाला, तीर-धनुष जैसे हथियार लेकर निकलने तथा बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध रहेगा.
- पांच से अधिक लोगों का जुटना प्रतिबंधित: शांति भंग करने के उद्देश्य से पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर रोक है (यह आदेश पुलिस, मजिस्ट्रेट, स्वास्थ्यकर्मियों और मीडिया पर लागू नहीं होगा).
यह आदेश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा. फिलहाल पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और रैपिड एक्शन फोर्स व अतिरिक्त पुलिस बल तैनात हैं.