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हाई कोर्ट सख्त, सरकार से जवाब तलब झारखंड के 606 थानों को ऑडियो-वीडियो और नाइट विजन कैमरों से लैस करने की महत्वाकांक्षी योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। जनवरी 2026 में कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कार्यदायी एजेंसी ‘जैप-आईटी’ (JAP-IT) ने इसके लिए बकायदा टेंडर जारी किया था, लेकिन तकनीकी पेंच और पुनर्मूल्यांकन के चक्कर में इस टेंडर को रद्द कर दिया गया है। इस कछुआ चाल पर दो दिन पूर्व ही झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राज्य योजना प्राधिकृत समिति की अनुशंसा पर 09 जनवरी 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, लेकिन सरकार की इस सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना पर पिछले 5 महीनों से पूरी तरह ब्रेक लगा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली थी 134 करोड़ की स्वीकृति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह’ मामले में पारित आदेश के अनुपालन के लिए राज्य कैबिनेट ने 134 करोड़ रुपए के बजट के साथ 606 थानों में 8,854 सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इसके तहत 07 फरवरी 2026 को जैप-आईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए झारखंड सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ओपन टेंडर जारी किया। टेंडर की शर्तों पर चर्चा के लिए धुर्वा (रांची) स्थित इंजीनियर्स हॉस्टल में देश भर की टेक कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल प्री-बिड बैठक भी आयोजित की गई थी। इसके लिए कंपनियों से 2 करोड़ 30 लाख रुपए की सुरक्षा राशि (EMD) मांगी गई थी, लेकिन इसके बाद 25 मार्च 2026 को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए इस टेंडर को अचानक रद्द कर दिया गया। अधिकारी बोले- अभी नया हूँ, जानकारी नहीं इस पूरे मामले पर जैप-आईटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चंदन कुमार का कहना है कि वे अभी यहाँ नए-नए आए हैं, इसलिए उन्हें इस मामले में अधिक जानकारी नहीं है। भले ही तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द कर री-टेंडरिंग की प्रक्रिया चलाने की बात कही जा रही हो, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी 5 महीने का लंबा वक्त बीत जाने को झारखंड हाई कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने थानों में सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर सरकार से तीखा सवाल पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत थानों के हर कोने को ऑडियो-वीडियो कैमरों से कवर करने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? अब नए सिरे से जारी होगा री-टेंडर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सरकारी परियोजनाओं में तकनीकी बदलावों, कंपनियों की ओर से प्री-बिड मीटिंग में आए सुझावों और नियमों को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पहले टेंडर को रद्द किया गया है। अब जैप-आईटी नियमों में आवश्यक संशोधन करके तुरंत री-टेंडर यानी नया निविदा प्रस्ताव निकालने की तैयारी में है, जिसे जल्द ही जारी किया जाएगा।
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