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Jharkhand Women Making Forest Pickles: आज के समय में जंगलों की जो संपदा कहीं खो गई है, उसे आम लोगों की थाली तक अचार, शहद वगैरह के रूप में पहुंचा रहीं हैं जमशेदपुर की सुषमा. उनका ब्रांड ‘ट्राइबल वेन्यू’ ओल, फुटकल, बास्करील जैसी जंगली फलों का स्वादिष्ट अचार और दूसरी देसी चीजें बना पूरे देश में सप्लाई करता है. इससे गांव की महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.
जमशेदपुर. झारखंड अपने घने जंगलों, प्राकृतिक संपदा और अनोखी वन उपज के लिए पूरे देश में जाना जाता है. यहां के जंगलों में ऐसे कई फल, फूल और जड़ी-बूटियां मिलती हैं, जो न सिर्फ स्वाद में खास होती हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होती हैं. लंबे समय तक ये उत्पाद केवल स्थानीय लोगों तक ही सीमित रहे, लेकिन अब झारखंड की बेटी सुषमा ने इन्हें देशभर के लोगों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है. उनके प्रयास से जंगलों का स्वाद अब आधुनिक पैकिंग के साथ लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है.
जंगल के फल पहुंचें शहरवासियों तक
सुषमा ने ‘ट्राइबल वेन्यू’ नामक एक अनोखी पहल की शुरुआत की है. इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य झारखंड के जंगलों में मिलने वाले पारंपरिक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है. शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन आज इस पहल से 20 से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण महिलाओं की है, जो घर के कामकाज के साथ-साथ इस उद्यम में भी योगदान दे रही हैं.
फुटकल, ओल, बास्करील का अचार
ट्राइबल वेन्यू की सबसे बड़ी खासियत यहां तैयार होने वाले पारंपरिक अचार हैं. सुषमा और उनकी टीम जंगलों में मिलने वाले फुटकल, ओल, साधना और बास्करील जैसे दुर्लभ फलों और वन उत्पादों से स्वादिष्ट अचार तैयार करती है. इसके अलावा नीम, जामुन, आंवला और अन्य कई प्राकृतिक उत्पादों का भी उपयोग किया जाता है. इन अचारों में न केवल पारंपरिक स्वाद मिलता है, बल्कि उनमें स्वास्थ्यवर्धक गुण भी मौजूद रहते हैं, जिसके कारण लोगों के बीच इनकी मांग लगातार बढ़ रही है.
ये उत्पाद भी बनते हैं
अचार के अलावा ट्राइबल वेन्यू जंगलों से प्राप्त शुद्ध देसी शहद, सूखे वन उत्पाद और अन्य पारंपरिक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराता है. सभी उत्पादों को एकत्र करने के बाद साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है. फिर उन्हें आधुनिक तकनीक और आकर्षक पैकिंग के साथ तैयार किया जाता है, ताकि देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षित रूप से पहुंचाया जा सके.
महिलाओं को मिल रहा रोजगार
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वे अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. जंगलों से फल और वन उत्पाद एकत्र करने से लेकर उनकी सफाई, सुखाने, अचार बनाने और पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. इससे उन्हें अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है और अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार हुआ है.
पूरे देश में पहुंच रहा झारखंड का स्वाद
सुषमा का यह प्रयास केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि झारखंड की पारंपरिक संस्कृति, स्वाद और वन संपदा को पहचान दिलाने का अभियान बन चुका है. ट्राइबल वेन्यू के माध्यम से जंगलों में मिलने वाले अनमोल उत्पाद आज देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंच रहे हैं. यह पहल साबित करती है कि अगर स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं और आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल कायम की जा सकती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें