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प्रोपेन गैस आपूर्ति की चेन टूटी तो बीएसएल ने पीएनजी को बनाया...



वैश्विक युद्ध के घने बादलों और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बीएसएल ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरू मध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही और आपूर्ति ठप हुई, तो देश के स्टील उत्पादन पर एक बड़ा और गंभीर खतरा मंडराने लगा था। स्टील उत्पादन के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले ईंधन, प्रोपेन गैस की विदेशी सप्लाई चेन टूट चुकी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि बीएसएल के स्टोरेज में प्रोपेन का बैकअप घटकर महज 15 दिनों का रह गया था। इस दौरान बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रोपेन गैस की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का साहसिक फैसला लिया और बीएसएल के इंजीनियरों ने कमाल कर दिखाया। उन्होंने युद्ध स्तर पर दिन-रात एक कर काम किया और महज 7 दिन के रिकॉर्ड समय में 7 किमी लंबी पीएनजी गैस पाइपलाइन खड़ी कर दी। इससे प्लांट को करोड़ों रुपए का सीधा फायदा भी हो रहा है। बीएसएल को प्रोपेन गैस की तुलना में पीएनजी गैस 40 प्रतिशत कम दर पर मिल रहा है। यानी प्रोपेन गैस पर प्रतिमाह करीब 6 करोड़ खर्च की जगह अब मात्र 3.60 करोड़ खर्च कर पीएनजी गैस मिलने लगा है। चर्चा है कि अगर समय रहते कोई ठोस फैसला न लिया जाता, तो स्टील मेल्टिंग शॉप, कोल्ड रोलिंग मिल और गैल्वेनाइजिंग लाइन जैसे विभागों में काम रुक जाता। कार्बन उत्सर्जन में आई कमी, पर्यावरण संरक्षण होगा 15 अप्रैल 2026 को 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में गैस छोड़ दी गई और इसका ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा। पिछले करीब डेढ़ महीने से प्लांट पीएनजी के दम पर अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है। बीएसएल प्रबंधन के इस मास्टर स्ट्रोक से प्लांट को चौतरफा और दीर्घकालिक फायदे हुए हैं। महंगी प्रोपेन के मुकाबले पीएनजी बेहद किफायती और सस्ती पड़ रही है। इस ऐतिहासिक बदलाव से प्लांट का ईंधन खर्च करीब 40 फीसदी तक घट गया है। लागत में आई इस भारी कमी के कारण, बीते डेढ़ महीने में ही संयंत्र को करोड़ों रुपए की बंपर बचत होने का अनुमान है, जो मुनाफे के रूप में दर्ज होगी। पहले प्रोपेन के बड़े पैमाने पर भंडारण (स्टोरेज) और ट्रकों से ट्रांसपोर्टेशन का भारी झंझट रहता था। अब पीएनजी के सीधे पाइपलाइन से आने के कारण वे सारे सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म हो गए हैं। पीएनजी के इस्तेमाल से प्लांट के कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है और बीएसएल ने ग्रीन स्टील के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। मिशन मोड : सात दिन का चैलेंजिंग डेलाइजिंग हालात की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रो पेन की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का फैसला लिया। प्लांट के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन और कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) अनूप कुमार दत्त के नेतृत्व में यूटिलिटी विभाग ने मोर्चा संभाला। बिना कोई समय गवाएं इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ आनन-फानन में गैस सेल्स एग्रीमेंट साइन किया गया। समझौते के तहत, आईओसीएल ने प्लांट की बाहरी सीमा तक 2 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया गया।



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